
📌 क्या है मामला?
राजिम बस स्टैंड के पास स्थित गृह विभाग की जमीन पर अवैध निर्माण कर दिया गया। यह जमीन 90 के दशक में पुलिस को आवंटित की गई थी, लेकिन अब वहां एक बड़ा कॉम्पलेक्स खड़ा हो गया है। इस पर धीरे-धीरे कब्जा भी हो रहा है। दुकानों को न बेचा गया, न किराए पर दिया गया, फिर भी यहां लोग अपना सामान रख रहे हैं।
📌 किसी को नहीं पता कि निर्माण किसने किया?
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नगर पंचायत ने कोई अनुमति नहीं दी।
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पुलिस को भी कोई जानकारी नहीं कि उनकी जमीन पर दुकानों का निर्माण कब और किसने करवाया।
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राजस्व रिकॉर्ड में अब भी यह जमीन गृह विभाग के नाम पर है, लेकिन इसका कोई ट्रांसफर नहीं हुआ।
📌 शिकायत के बाद भी कोई हल नहीं निकला
इस मामले की शिकायत गृहमंत्री विजय शर्मा तक पहुंची।
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सामाजिक कार्यकर्ता बलवंत राव ने SDM, SP, कलेक्टर और IG तक इसकी शिकायत की।
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पुलिस ने इसे हस्तक्षेप योग्य मामला नहीं बताया, क्योंकि यह राजस्व प्रकरण से जुड़ा है।
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पुलिस ने माना कि जमीन पर कब्जा हुआ है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
📌 पुलिस के लिए जरूरी थी यह जमीन
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पुलिस थाना शहर के मुख्य मार्ग से 1 किलोमीटर अंदर है।
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यह जमीन मेन रोड पर होने के कारण पुलिस के लिए बेहद जरूरी थी।
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लेकिन नगर पंचायत और पुलिस प्रशासन ने इसे बचाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
📌 नगर पंचायत को भी नुकसान
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अगर यहां व्यवसायिक कॉम्पलेक्स का निर्माण नगर पंचायत करती, तो उसे राजस्व मिलता।
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अवैध कब्जे के कारण कोई टैक्स नहीं आ रहा, जिससे सरकारी राजस्व का भी नुकसान हो रहा है।
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दुकानें किसके कब्जे में हैं और क्या वे किराया दे रहे हैं, यह भी जांच का विषय है।
📌 क्या बोले तहसीलदार?
राजिम तहसीलदार डिंपल ध्रुव ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं थी। अब वे इसकी जांच करवाएंगी और नियमों के तहत जरूरी कार्रवाई करेंगी।
👉 कुल मिलाकर, यह मामला प्रशासन की लापरवाही को दिखाता है, जहां सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा हो गया और किसी को पता भी नहीं चला।
