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छत्तीसगढ़ में बारिश-तूफान से तेंदूपत्ता संग्रहण पर असर, 2 लाख बोरा कम जमा

रायपुर (छत्तीसगढ़): इस साल प्रदेश में बारिश, आंधी-तूफान और ओलावृष्टि के कारण तेंदूपत्ता संग्रहण पर बड़ा असर पड़ा है। तय लक्ष्य की तुलना में करीब 2 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता कम जमा हुआ है। खराब मौसम की वजह से पत्तों की तुड़ाई समय पर नहीं हो पाई, और जो पत्ते थे वे भी खराब हो गए।

क्या हुआ नुकसान?

  • बस्तर क्षेत्र में पहले तेंदूपत्ता तुड़ाई शुरू की गई थी, लेकिन वहां भी मौसम की मार के चलते लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया।

  • अप्रैल-मई में तेज बारिश, तूफान और ओलों ने पत्तों को नुकसान पहुंचाया

  • बीजापुर जैसे इलाकों में किसान तुड़ाई नहीं कर पाए

  • पिछले साल की तुलना में 2 लाख बोरा कम संग्रह हुआ

कितना संग्रहण हुआ?

  • अब तक प्रदेश में 13 लाख 5389.684 मानक बोरा तेंदूपत्ता का संग्रहण हो चुका है।

  • जबकि लक्ष्य 16.72 लाख मानक बोरा था।

संग्राहकों को मिलेगा भुगतान

  • 902 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों से जुड़े तेंदूपत्ता संग्राहकों को 7 करोड़ 44 लाख रुपए से ज्यादा का भुगतान किया जा रहा है।

  • ये भुगतान ऑनलाइन उनके खातों में जमा किया जाएगा।

  • प्रति मानक बोरा के हिसाब से 5500 रुपए की दर से रकम दी जा रही है।

एक मानक बोरा में कितना तेंदूपत्ता?

  • 1 गड्डी = 100 पत्ते

  • 1 मानक बोरा = 1000 गड्डी यानी 1,00,000 पत्ते

अफसरों का क्या कहना है?

राज्य लघु वनोपज संघ के एमडी अनिल साहू के मुताबिक, लगातार खराब मौसम और तेज हवाओं के कारण पत्ते दागदार और खराब हो गए, जिससे तुड़ाई और संग्रहण प्रभावित हुआ।

नतीजा: खराब मौसम की वजह से इस साल तेंदूपत्ता संग्राहकों को नुकसान झेलना पड़ा है, लेकिन सरकार की तरफ से ऑनलाइन भुगतान के जरिए राहत दी जा रही है

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