
कैसे हुई जांच?
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सबसे पहले बसों का रजिस्ट्रेशन और दस्तावेजों की जांच की गई। इसमें रजिस्ट्रेशन, परमिट, फिटनेस सर्टिफिकेट, बीमा, पीयूसी, रोड टैक्स और ड्राइवर का लाइसेंस आदि शामिल थे।
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इसके बाद मैकेनिकल जांच हुई जिसमें लाइट, ब्रेक, क्लच, स्टेयरिंग, टायर, हॉर्न, वाइपर और रिफ्लेक्टर को चेक किया गया।
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सुरक्षा मानकों जैसे सीसीटीवी कैमरा, स्पीड गवर्नर, इमरजेंसी विंडो, स्कूल का नाम और नंबर, फर्स्ट एड बॉक्स और फायर एक्सटिंग्विशर की भी जांच की गई।
जांच में क्या मिला?
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जिले के छह स्कूलों की 81 बसों की जांच में 15 बसों में खामियां पाई गईं, जैसे कि खराब वाइपर, टूटा शीशा और ड्राइवर का बिना लाइसेंस होना।
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इन पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए ₹8000 का जुर्माना लगाया गया और सुधार के निर्देश दिए गए।
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दो दिन के कैंप में कुल 22 स्कूलों की 248 बसों की जांच की गई, जिसमें 23 बसें खराब पाई गईं और ₹17,000 समन शुल्क वसूला गया।
ड्राइवरों की आंखों की जांच
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40 बस चालकों की आंखों में दिक्कत पाई गई। उन्हें चश्मा पहनने और नजर का नंबर बदलवाने की सलाह दी गई।
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जिन बसों की जांच शिविर में नहीं हो सकी है, उनके खिलाफ औचक निरीक्षण के जरिए कार्रवाई की जाएगी।
ट्रैफिक एएसपी ऋचा मिश्रा ने बताया कि इस मुहिम का मकसद बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। सभी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि बिना सुधार के किसी भी खराब बस को बच्चों के परिवहन के लिए इस्तेमाल न किया जाए।
