
बंद स्कूल भवन में बना दिया नया शौचालय
हाल ही में जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने इस बंद भवन में 3 लाख रुपए खर्च कर नया शौचालय भी बनवा दिया। सवाल उठता है कि जिस स्कूल भवन में कभी बच्चे आए ही नहीं, उसमें शौचालय बनवाने का क्या तुक है?
जिम्मेदार कौन?
इस लापरवाही के लिए स्कूल के प्राचार्य और उस समय के जिला शिक्षा अधिकारी जिम्मेदार माने जा रहे हैं। भवन तैयार होने के बाद हाईस्कूल को इसमें शिफ्ट किया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब ये इमारत खाली और जर्जर हो चुकी है और शराबियों व असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गई है।
पढ़ाई में नुकसान, शिक्षक समय से पहले छुट्टी पर
फिलहाल हाईस्कूल के बच्चे पुराने भवन में ही पढ़ रहे हैं। वहां पर मिडिल स्कूल और हाईस्कूल दोनों के बच्चे एक साथ पढ़ते हैं।
-
पढ़ाई का समय सुबह 7 बजे से 11:30 बजे तक है, यानी सिर्फ 4.5 घंटे।
-
अगर बच्चों को नए भवन में शिफ्ट किया गया होता, तो सुबह 10 से शाम 4 बजे तक 6 घंटे की पढ़ाई हो सकती थी।
इस तरह बच्चे हर दिन 2 घंटे की पढ़ाई से वंचित हो रहे हैं और शिक्षकों को समय से पहले छुट्टी मिल रही है।
मरम्मत के पैसे गए कहां?
हर साल स्कूल की मरम्मत के लिए लगभग 1 लाख रुपए आते हैं। 12 साल में दोनों स्कूलों के लिए अच्छा-खासा बजट आया, लेकिन भवन की हालत बिगड़ती रही। न तो रंग-रोगन हुआ, न दरवाजे ठीक किए गए।
अब क्या हो रहा है?
बोरसी के इस बंद पड़े स्कूल भवन को लेकर कलेक्टर दुर्ग स्तर पर चर्चा हो रही है। इससे जुड़ी पूरी जानकारी फिलहाल जिला शिक्षा अधिकारी, दुर्ग ही दे सकते हैं।
