
कैंडियन शैली और हनुमान चालीसा का संगम
डॉ. सुल्लेरे ने अपनी कल्पना शक्ति का उपयोग कर कैंडियन पेंटिंग शैली में हनुमान चालीसा के भावों को पेश किया। उन्होंने इस पेंटिंग को बनाने के लिए किसी पूर्व उदाहरण या संदर्भ का इस्तेमाल नहीं किया। यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है।
वैश्विक अतिथियों ने की प्रशंसा
वल्र्ड रामायण कॉन्फ्रेंस 2026 में इस पेंटिंग को श्रीलंका के भारतीय उच्चायोग स्थित स्वामी विवेकानंद कल्चरल सेंटर द्वारा प्रकाशित पुस्तक में शामिल किया गया। श्रीलंका से आए अतिथियों महेल बंदारा, उडुगामा सरनाथिस्सा थेरो और दिनेश सुबासिंघे ने इस पेंटिंग की विशेष प्रशंसा की।
गौरव और भविष्य की राह
इस उपलब्धि के पीछे मार्गदर्शक बाला वी संकत्री, साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी, पूर्व मंत्री अजय विश्नोई और डॉ. अखिलेश गुमाश्टा का योगदान भी है। इनके संरक्षण में स्थानीय कलाकारों को ऐसे विश्व मंच पर अपनी कला दिखाने का अवसर मिला।
डॉ. शैलजा की यह पेंटिंग जबलपुर और भारत की कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाली एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
