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जम्मू-कश्मीर की 13% आबादी ड्रग्स ले रही:पंजाब और सीमा पार से पहुंच रही खेप; ड्रग्स माफिया पर शिकंजे के लिए 100 दिन का अभिया

जम्मू-कश्मीर में बढ़ती ड्रग्स की चुनौती: 13% आबादी नशे की चपेट में, माफिया पर कार्रवाई के लिए 100 दिन का अभियान

जम्मू-कश्मीर में नशे की बढ़ती समस्या को लेकर चिंता गहरा गई है। हाल ही में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, प्रदेश की करीब 13 प्रतिशत आबादी किसी न किसी रूप में ड्रग्स के संपर्क में है। बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने अब ड्रग्स माफिया के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू करने की तैयारी की है।

सूत्रों के मुताबिक, पंजाब और सीमा पार से जम्मू-कश्मीर में नशीले पदार्थों की तस्करी लगातार बढ़ रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि कुछ संगठित नेटवर्क युवाओं को निशाना बनाकर ड्रग्स सप्लाई कर रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने नशे के कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए 100 दिन का विशेष अभियान शुरू करने का फैसला लिया है।

अभियान के तहत पुलिस, नारकोटिक्स विभाग और सुरक्षा एजेंसियां संयुक्त कार्रवाई करेंगी। इसमें तस्करी के रूट्स की पहचान, संदिग्ध नेटवर्क की निगरानी और बड़े सप्लायर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई शामिल होगी। स्कूल-कॉलेजों और संवेदनशील इलाकों में जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी, सीमा पार से होने वाली तस्करी और सोशल मीडिया के जरिए फैलते नेटवर्क ने समस्या को और गंभीर बना दिया है। युवाओं में बढ़ती लत को लेकर परिवारों और समाज में चिंता बढ़ रही है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हाल के महीनों में कई ड्रग्स तस्करों को गिरफ्तार किया गया है और बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ भी जब्त किए गए हैं। प्रशासन का दावा है कि आने वाले दिनों में इस अभियान को और तेज किया जाएगा ताकि युवाओं को नशे के जाल से बचाया जा सके।

सामाजिक संगठनों ने भी सरकार से पुनर्वास केंद्रों की संख्या बढ़ाने और नशे से प्रभावित युवाओं के लिए बेहतर इलाज व काउंसलिंग व्यवस्था की मांग की है।

फिलहाल जम्मू-कश्मीर में ड्रग्स के खिलाफ यह अभियान सुरक्षा और सामाजिक दोनों मोर्चों पर बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

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