
इस प्रोजेक्ट के लिए JDA जल्द ही डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कराने के लिए टेंडर जारी करेगा। डीपीआर बनाने पर लगभग 5 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
चरणों में होगा निर्माण
सूत्रों के अनुसार इस परियोजना को चरणबद्ध तरीके से बनाया जाएगा। पहले चरण में सांगानेर और प्रताप नगर क्षेत्र में करीब 5 से 7 किलोमीटर तक नदी के ऊपर एलिवेटेड रोड बनाई जा सकती है।
खाली जमीन पर सड़क बनाने का सुझाव
विशेषज्ञों का मानना है कि नदी के कई हिस्सों में दोनों तरफ खाली जमीन है। वहां साधारण सड़क बनाकर भी ट्रैफिक को सुचारू किया जा सकता है। इससे खर्च भी कम होगा और काम जल्दी पूरा हो सकेगा। जहां घनी आबादी है, वहां एलिवेटेड रोड बनाने पर विचार किया जा सकता है।
रास्ते में कई तकनीकी चुनौतियां
इस परियोजना को लागू करने में कई तकनीकी बाधाएं भी सामने आ सकती हैं।
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अजमेर रोड पर पहले से बनी एलिवेटेड रोड से करीब 7.5 मीटर ऊपर नई एलिवेटेड रोड बनानी होगी।
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आतिश मार्केट क्षेत्र में मेट्रो लाइन के ऊपर से सड़क निकालनी पड़ेगी।
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एलिवेटेड रोड से वाहनों को ऊपर-नीचे लाने के लिए मुख्य सड़क पर अतिरिक्त जमीन की जरूरत होगी।
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कई जगहों पर 5 से 6 एंट्री और एग्जिट प्वाइंट बनाने पड़ेंगे।
अन्य बाधाएं भी सामने
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सुशीलपुरा पुलिया (अजमेर रोड) पर आचार्य तुलसी सेतु के कारण डिजाइन चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
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आतिश मार्केट में मेट्रो रूट के ऊपर से सड़क ले जानी होगी, जिसके लिए अतिरिक्त ऊंचाई रखनी पड़ेगी।
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मानसरोवर क्षेत्र में हाईटेंशन बिजली लाइनें भी रास्ते में बाधा बन सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन्हें भूमिगत किया जा सकता है।
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बम्बाला पुलिया और टोंक रोड पर मेट्रो फेज-2 का प्रस्तावित रूट भी डिजाइन को प्रभावित कर सकता है।
JDA अधिकारियों का कहना है कि इन सभी विभागों के साथ समन्वय करके परियोजना का अंतिम डिजाइन तैयार किया जाएगा।
