
1977 में जमीन अधिग्रहण का दावा
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में कहा कि केंद्र सरकार ने 1977 में जहांगीरपुरी और आसपास के तीन-चार गांवों की जमीन अधिग्रहित की थी। बाद में यह जमीन कॉलोनी विकसित करने के लिए DDA को दी गई।
वकील का कहना है कि 1980 में वक्फ बोर्ड ने अधिसूचना जारी कर इस जमीन पर दावा किया, लेकिन जब जमीन सरकार ने अधिग्रहित कर ली थी तो वह वक्फ की नहीं हो सकती।
धार्मिक ढांचा और बाजार का मुद्दा
अदालत को बताया गया कि विवादित जमीन पर मस्जिद या मकबरा जैसे धार्मिक ढांचे बने हैं और वहां एक बाजार भी चल रहा है। सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर दावा किया गया कि ए और बी ब्लॉक पूरी तरह सरकारी जमीन है और उस पर कब्जा किया गया है।
शाही ईदगाह समिति का पक्ष
शाही ईदगाह प्रबंधन समिति का कहना है कि यह मामला पहले से वक्फ ट्रिब्यूनल में लंबित है। इसके बावजूद DDA जमीन पर अपने बोर्ड लगा रहा है। समिति ने अदालत से अनुरोध किया कि DDA को बोर्ड लगाने से रोका जाए।
कोर्ट ने DDA से जवाब मांगा है। DDA के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।
अगली सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट ने सभी पक्षों की बात सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी।
