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जापान में 30 साल रहकर भारतीय ने खड़ा किया कारोबार, डिपोर्टेशन का मिला आदेश तो फूट-फूटकर रोया

जापान में 30 साल रहकर भारतीय ने खड़ा किया कारोबार

डिपोर्टेशन का आदेश मिला तो फूट-फूटकर रोया, बोला- “यही मेरा घर है”

जापान में करीब 30 साल से रह रहे एक भारतीय नागरिक की कहानी लोगों को भावुक कर रही है। लंबे समय तक जापान में मेहनत कर उन्होंने अपना कारोबार खड़ा किया, परिवार और सामाजिक पहचान बनाई, लेकिन अब उन्हें देश छोड़ने यानी डिपोर्टेशन का आदेश मिला है।

जानकारी के अनुसार, भारतीय नागरिक लंबे समय से जापान में रहकर काम कर रहे थे। उन्होंने वहां छोटे स्तर से शुरुआत की और धीरे-धीरे अपना बिजनेस खड़ा किया। स्थानीय लोगों से उनके संबंध भी मजबूत बताए जा रहे हैं। लेकिन इमिग्रेशन नियमों से जुड़े मामले में अब प्रशासन ने उन्हें भारत वापस भेजने का आदेश दिया है।

डिपोर्टेशन का आदेश सुनने के बाद वह भावुक हो गए और रो पड़े। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा जापान में बिताया है। यहां उनका काम, पहचान और यादें जुड़ी हैं, इसलिए अचानक देश छोड़ने का आदेश उनके लिए बेहद दर्दनाक है।

इस मामले ने जापान में रहने वाले प्रवासियों और लंबे समय से बसे विदेशी नागरिकों की स्थिति पर नई बहस छेड़ दी है। कई लोगों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति दशकों तक किसी देश में रहकर मेहनत करता है, टैक्स देता है और समाज का हिस्सा बन जाता है, तो उसके मामले में मानवीय दृष्टिकोण भी अपनाया जाना चाहिए।

वहीं इमिग्रेशन अधिकारियों का पक्ष नियमों और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा हो सकता है। ऐसे मामलों में वीजा, रेजिडेंसी स्टेटस और दस्तावेजों की स्थिति अहम मानी जाती है।

बड़ी बात

जापान में 30 साल रहने के बाद भारतीय नागरिक को डिपोर्टेशन आदेश मिलने से मामला चर्चा में आ गया है। एक तरफ इमिग्रेशन कानून हैं, तो दूसरी तरफ उस व्यक्ति की पूरी जिंदगी और मेहनत से बनाया गया कारोबार। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि क्या उन्हें राहत मिलेगी या जापान छोड़ना पड़ेगा।

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