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जालोर बाईपास रोड की बड़ी अड़चन दूर, अब तेजी से होगा काम

राजस्थान के जालोर जिले में 15 किलोमीटर लंबे नेशनल हाईवे 325 बाईपास रोड प्रोजेक्ट की बड़ी रुकावट दूर हो गई है। मार्ग के बीच और किनारे लगे हाईटेंशन लाइन के टॉवर हटा दिए गए हैं। यह काम राजस्थान राज्य विद्युत प्राधिकरण की निगरानी में पूरा हुआ।

पिछले 12 दिनों से टॉवर शिफ्टिंग का काम चल रहा था। अंतिम चरण में तीन पुराने टॉवर हटाए गए। अब उम्मीद है कि बाकी काम तेजी से पूरा होगा और यह बाईपास रोड अप्रैल में यातायात के लिए खोल दी जाएगी। यह जालोर जिले का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है, जिससे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार होगा।

30 मीटर ऊंचे टॉवर 20 सेकंड में गिरे

मार्ग पर करीब 30 मीटर ऊंचे तीन पुराने टॉवर थे। इनमें से एक टॉवर सड़क के बीच में था। फाउंडेशन को काटने के बाद ट्रैक्टर और रस्सियों की मदद से इन्हें गिराया गया। फाउंडेशन कटते ही करीब 20 सेकंड में ये बड़े टॉवर जमीन पर गिर गए।

दो साल बाद मिला शटडाउन

हाईटेंशन लाइन शिफ्ट करने की प्रक्रिया करीब दो साल से चल रही थी, लेकिन बिजली शटडाउन नहीं मिल पा रहा था। आखिरकार 12 दिन का शटडाउन मिला। इसमें 8 दिन दिन में बिजली बंद रखकर रात में वैकल्पिक आपूर्ति दी गई, जबकि 4 दिन जालोर-सायला क्षेत्र में पूरी तरह बिजली बंद रही।

प्रोजेक्ट की स्थिति

15 किलोमीटर बाईपास का मुख्य हिस्सा तैयार हो चुका है। अब केवल आर्च ब्रिज और सांकरना जवाई नदी पुल के दोनों हिस्सों को जोड़ने का काम बाकी है। साथ ही संकेतक और सुरक्षा से जुड़े अन्य काम अगले 30 दिनों में पूरे किए जाएंगे।

क्यों जरूरी है बाईपास?

अभी औद्योगिक क्षेत्र से भारी ट्रक और ट्रेलर जालोर शहर के बीच से गुजरते हैं। इससे शहर में जाम की समस्या बनी रहती है। बाईपास बनने के बाद भारी वाहन सीधे औद्योगिक क्षेत्र तक पहुंच सकेंगे, जिससे शहर के अंदर ट्रैफिक का दबाव कम होगा।

यह नया मार्ग बिशनगढ़ रोड से शुरू होकर लेटा गांव के पास से सांकरना जवाई नदी पुल पार कर मुख्य मार्ग से जुड़ेगा। इससे औद्योगिक क्षेत्र तक एक ट्रैफिक राहत कॉरिडोर मिलेगा और शहर की यातायात व्यवस्था बेहतर होगी।

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