
अवैध खनन को लेकर उठे सवाल
🔹 विधानसभा में विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने अवैध बजरी और पत्थर खनन का मुद्दा उठाया था।
🔹 बावजूद इसके, खनन माफिया खुलेआम कारोबार कर रहे हैं।
🔹 प्रशासनिक स्तर पर सख्त कार्रवाई नहीं हो रही है।
जिले में बजरी और पत्थर खनन की स्थिति
✔️ जिले में 50 से अधिक पत्थर खदानें अधिकृत हैं।
✔️ बजरी की सिर्फ दो कानूनी लीज (एक मांगरोल में और दूसरी किशनगंज में) हैं।
✔️ बनास नदी की बजरी को अवैध रूप से लाकर बेचा जा रहा है।
कैसे हो रहा अवैध बजरी व्यापार?
➡️ बनास नदी से 10-15 डंपर बजरी प्रतिदिन अवैध रूप से लाई जा रही है।
➡️ ज्यादातर बजरी माधोपुर क्षेत्र से आती है, जिसमें 65-70 टन ओवरलोडिंग होती है।
➡️ पूरे मार्ग में कई पुलिस थाने होते हुए भी जांच नहीं होती।
➡️ सीसवाली क्षेत्र सहित जिले के कई इलाकों में अवैध बजरी के स्टॉक बनाए गए हैं।
रॉयल्टी और अवैध मुनाफा
✔️ कानूनी तरीके से लाई गई बजरी (35-40 टन) पर 20-22 हजार रुपए की रॉयल्टी बनती है।
✔️ अवैध रूप से ओवरलोड (65-70 टन) लाई गई बजरी पर 25-30 हजार रुपए की रॉयल्टी बनती है।
✔️ अगर प्रशासन कार्रवाई करे, तो लाखों रुपए का जुर्माना वसूला जा सकता है।
स्थानीय नदियों में भी जारी अवैध खनन
🔹 पार्वती, परवन और कालीसिंध नदियों से अवैध रूप से बजरी निकाली जा रही है।
🔹 हाल ही में कोटा खनन विभाग ने कोटड़ी सुंडा क्षेत्र में दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियां जब्त कीं।
🔹 जिले में अवैध खनन पर प्रशासनिक लापरवाही जारी है।
प्रशासन का बयान
👉 खनन विभाग के एएमई भंवरलाल लबाना ने कहा –
“फिलहाल ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। नियमित जांच की जा रही है। यदि कोई स्टॉक या ट्रॉला अवैध रूप से पकड़ा जाता है, तो कार्रवाई की जाएगी।”
➡️ कुल मिलाकर, प्रशासन की ढील के कारण जिले में अवैध बजरी खनन धड़ल्ले से जारी है।
