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जेलेंस्की की चेतावनी के बावजूद विक्ट्री डे परेड में शामिल होंगे शी जिनपिंग, चीन ने दिखाई सख्ती

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मॉस्को/बीजिंग/कीव: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के बीच मॉस्को में आयोजित होने वाली विक्ट्री डे परेड को लेकर बड़ा राजनयिक विवाद खड़ा हो गया है। यूक्रेन की चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 9 मई को इस परेड में शामिल होने का फैसला किया है, जिससे वैश्विक राजनीति में हलचल मच गई है।

रूस ने दी परेड की मेजबानी, पुतिन ने भेजा न्योता

द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर सोवियत संघ की जीत की 80वीं वर्षगांठ पर रूस ने विक्ट्री डे परेड का आयोजन किया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसमें भाग लेने के लिए कई देशों के नेताओं को आमंत्रित किया है, जिनमें चीन, ब्राजील, सर्बिया और स्लोवाकिया के प्रमुख शामिल हैं।

चीन की घोषणा से तिलमिलाया यूक्रेन

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने चेतावनी दी थी कि परेड में भाग लेने वाले विदेशी मेहमानों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा सकती। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चीन रूस को हथियारों और गोला-बारूद की आपूर्ति कर रहा है, जो यूक्रेनी संप्रभुता का उल्लंघन है।

युद्धविराम पर भी नहीं बनी बात

रूस ने समारोह को ध्यान में रखते हुए 7 से 9 मई तक तीन दिवसीय युद्धविराम की पेशकश की थी, जिसे यूक्रेन ने खारिज कर दिया। जेलेंस्की का कहना है कि कम से कम 30 दिन का ठोस युद्धविराम ही किसी सकारात्मक मंशा का संकेत होगा, न कि प्रतीकात्मक विराम।

शी जिनपिंग की यात्रा से बदलती वैश्विक कूटनीति के संकेत

क्रेमलिन के अनुसार, शी जिनपिंग की रूस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी, वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी। इस यात्रा को रूस-चीन गठबंधन की मजबूती के रूप में देखा जा रहा है, जो पश्चिमी देशों के लिए एक स्पष्ट संदेश है।

विक्ट्री डे परेड: शक्ति प्रदर्शन से आगे

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार की विक्ट्री परेड केवल इतिहास का स्मरण नहीं है, बल्कि यह नए वैश्विक शक्ति संतुलन का मंच भी बनती जा रही है। पुतिन और जिनपिंग की नजदीकियां इस ओर इशारा करती हैं कि वैश्विक ध्रुवीकरण और तेज़ हो सकता है।

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