
सात खास उत्पादों पर टिकी उम्मीद
जोधपुर से जुड़े सात विशिष्ट उत्पादों को जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है। अहमदाबाद में इन उत्पादों की सुनवाई चल रही है और आने वाले कुछ महीनों में फैसला आने की उम्मीद है। खास बात यह है कि पूरे प्रदेश से 14 आवेदन हुए हैं, जिनमें से 7 अकेले जोधपुर के हैं।
इन उत्पादों में शामिल हैं:
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पत्थर की छतरियां
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आयरन क्राफ्ट
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वुडन क्राफ्ट (फर्नीचर)
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जोधपुरी साफा
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राजस्थानी लहरिया
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मथानिया मिर्च
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राजस्थानी जीरा
किसानों और कारीगरों को होगा सबसे बड़ा फायदा
इन उत्पादों का संबंध हजारों किसानों और कारीगरों की आजीविका से है। जीआई टैग मिलने से:
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उत्पादों की नकल पर रोक लगेगी
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कानूनी सुरक्षा मिलेगी
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बेहतर दाम और नए बाजार मिलेंगे
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निर्यात के रास्ते खुलेंगे
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बिचौलियों पर नियंत्रण होगा
इससे स्थानीय रोजगार बढ़ेगा और नई पीढ़ी को पारंपरिक काम अपनाने की प्रेरणा मिलेगी।
सरकारी और संस्थाओं का सहयोग
मथानिया मिर्च, राजस्थानी जीरा, जोधपुरी साफा और लहरिया के लिए आवेदन नाबार्ड के सहयोग से किए गए हैं। इनमें तिंवरी किसान उत्पादक संगठन और संग वेलफेयर सोसायटी जैसी संस्थाएं भी जुड़ी हुई हैं। कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर भी इस प्रयास में सहयोग कर रहा है।
पहले से कई उत्पादों को मिल चुका है जीआई टैग
राजस्थान में अब तक 21 उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है, जैसे सोजत की मेहंदी, बीकानेरी भुजिया, कोटा डोरिया, सांगानेरी-बगरू प्रिंट, नाथद्वारा की पिछवाई पेंटिंग और मकराना मार्बल। यह राज्य की समृद्ध संस्कृति का प्रमाण है।
जोधपुर की ब्रांड वैल्यू बढ़ाने का मौका
अगर जोधपुर के इन सात उत्पादों को जीआई टैग मिलता है, तो इससे न सिर्फ इनकी पहचान बढ़ेगी, बल्कि जोधपुर और मारवाड़ की ब्रांड वैल्यू भी मजबूत होगी। पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और पश्चिमी राजस्थान के लिए नए अवसर खुलेंगे।
अब समय है कि सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर इस पहल को सफल बनाएं, ताकि जोधपुर की मेहनत, परंपरा और पहचान को दुनिया भर में सम्मान मिल सके।
