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ट्रंप और पाकिस्तानी जनरल की मुलाकात पर कांग्रेस का तीखा हमला, कहा – ‘हाउडी मोदी’ के बाद ‘नमस्ते ट्रंप’ को तिहरा झटका

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वाशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका में पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच होने वाले लंच को लेकर भारत में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारतीय कूटनीति की आलोचना की है।


कांग्रेस का आरोप – पहलगाम हमले से जुड़े व्यक्ति को ट्रंप का सम्मान

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा,

“वह व्यक्ति जिसे 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले से जोड़ा गया था, आज वही अमेरिका में ट्रंप के साथ लंच कर रहा है।”

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यही कारण है कि डोनाल्ड ट्रंप ने G7 सम्मेलन अचानक छोड़ दिया और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दूरी बनाई?


‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर ट्रंप का दावा और कांग्रेस की नाराजगी

भारत ने हाल ही में पाकिस्तान के आतंकी ढांचों के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था। इसके तुरंत बाद ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम करवाया। इस बयान को लेकर कांग्रेस ने सवाल किया कि क्या इससे भारत की कार्रवाई अधूरी रह गई?

जयराम रमेश ने यह भी कहा कि अमेरिका के सेंट्रल कमांड प्रमुख जनरल माइकल कुरिल्ला द्वारा पाकिस्तान को “आतंक विरोधी अभियानों में अहम भागीदार” बताना, भारत की विदेश नीति के लिए एक और झटका है।


“नमस्ते ट्रंप बन गया उलटा संदेश”: कांग्रेस

जयराम रमेश ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि

नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम अब ‘हाउडी मोदी’ के बाद भारत के लिए तीसरा बड़ा झटका बन गया है। भारत की कूटनीति बिखरती नज़र आ रही है और प्रधानमंत्री मोदी इस पूरे घटनाक्रम पर चुप हैं।”


पृष्ठभूमि: क्यों है ट्रंप-मुनीर की मुलाकात महत्वपूर्ण

यह लंच ऐसे समय पर हो रहा है जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है और अमेरिका की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। जनरल आसिम मुनीर वही सैन्य नेता हैं, जिनकी भूमिका को कांग्रेस ने पहलगाम आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया है। ऐसे व्यक्ति के साथ व्हाइट हाउस में मुलाकात, भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती मानी जा रही है।


निष्कर्ष

जहाँ सरकार ने अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, वहीं कांग्रेस के आरोपों ने निश्चित ही इस लंच मीटिंग को एक राजनीतिक तूफान में बदल दिया है। अब देखना यह होगा कि इस पर विदेश मंत्रालय या प्रधानमंत्री कार्यालय क्या रुख अपनाते हैं।

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