
कैसे काम करेगी यह तकनीक?
जेके लोन अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर डॉ. योगेश यादव ने एनआरआई एआई इंजीनियर राजेश कुमार के साथ मिलकर “वॉयस-ड्रिवन एआई असिस्टेंट” तैयार किया है।
यह सिस्टम डॉक्टर की आवाज को सुनता है और तुरंत उसे साफ और सटीक डिजिटल पर्चे में बदल देता है।
क्या होंगे फायदे?
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कागजी काम कम होगा
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डॉक्टर मरीज की जांच पर ज्यादा समय दे पाएंगे
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जांच रिपोर्ट का विश्लेषण कर सकेगा
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इलाज के विकल्प सुझा सकेगा
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मरीजों की लाइन (क्यू मैनेजमेंट) संभालने में मदद करेगा
अस्पतालों में भीड़ के कारण अक्सर डॉक्टरों का काफी समय लिखने-पढ़ने में चला जाता है। यह तकनीक उस समय को बचाने में मदद करेगी।
ग्रामीण और टेलीमेडिसिन में होगा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक ग्रामीण इलाकों और टेलीमेडिसिन के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकती है। जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है, वहां यह सिस्टम बड़ी मदद कर सकता है।
यह नई पहल चिकित्सा क्षेत्र में तकनीक और अनुभव के मेल का एक बड़ा उदाहरण मानी जा रही है।
