
क्या है मामला?
बैरवार निवासी किसान महिला रामदेवी रजक ने बताया कि उनके सास-ससुर कैंसर पीड़ित थे। उन्होंने अपनी जमीन की रजिस्ट्री वसीयत के रूप में उनके नाम कर दी थी। लेकिन सास-ससुर की मृत्यु के बाद भी नामांतरण (जमीन हस्तांतरण) नहीं हो रहा है।
रामदेवी ने तहसीलदार वंदना सिंह को शिकायत देते हुए बताया कि पदस्थ लिपिक उन्हें हर हफ्ते तहसील बुलाते हैं और पैसों की मांग करते हैं। महिला का आरोप है कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो प्रकरण निरस्त करने की धमकी दी जा रही है।
सीसीटीवी जांच की मांग
रामदेवी ने तहसील में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच करने की मांग की है। तहसील कार्यालय में पदस्थ नसीम खान पर पहले भी विवादों में रहने के आरोप लग चुके हैं। कोविड-19 के समय भी वे एसडीएम के रीडर रहते हुए विवादों में थे।
क्या कहते हैं अधिकारी?
नसीम खान (लीडर तहसीलदार हजारा) का कहना है,
“मैंने किसी से पैसे नहीं मांगे हैं। महिला की शिकायत गलत है। अधिकारी इसकी जांच कर रहे हैं।”
वंदना सिंह (तहसीलदार, जतारा) ने बताया,
“रामदेवी का नामांतरण का प्रकरण चल रहा है। 24 मार्च की पेशी में वह आई थीं और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे। 26 मार्च को भी पेशी थी, लेकिन कोई उपस्थित नहीं हुआ। मामला फरवरी में प्रस्तुत हुआ था और जांच जारी है।”
