
अधिकारियों को नहीं है जानकारी
सबसे हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों को इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। जेडीए ज़ोन-7 के अधिशासी अभियंता (XEN) निशांत खंडेलवाल का कहना है कि सड़क बनाने के लिए ग्रेवल डाली जा रही है और जो पेड़ बीच में आ रहे हैं, उन्हें नहीं हटाया गया है।
पेड़ों को बिना सोचे उखाड़ा गया
गौर करने वाली बात यह है कि गांधी पथ-पश्चिम की सड़क 80 फीट चौड़ी की जा रही है। कुछ महीने पहले जेडीए ने सड़क के दायरे में आने वाले निर्माणों को हटाने के लिए नोटिस भेजे थे, जिसके बाद ज्यादातर लोगों ने अपनी मर्जी से निर्माण हटा लिए। लेकिन इसके बाद जब सड़क बनाने का काम शुरू हुआ, तो पेड़ों को भी सीधे उखाड़ना शुरू कर दिया गया।
बारिश में जल्दबाज़ी से और बढ़ी परेशानी
जेडीए की टीम ने मानसून के दौरान ही सड़क खोदनी शुरू कर दी, जिससे अब इलाके में पानी भराव की समस्या पैदा हो गई है।
पेड़ बचेंगे नहीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि भले ही कुछ बड़े पेड़ अभी खड़े हैं, लेकिन उनके चारों तरफ की मिट्टी हटा दी गई है। ऐसे में ये पेड़ भी जल्द गिर सकते हैं। इस तरह से काम चलता रहा तो सड़क किनारे एक भी पेड़ नहीं बचेगा।
निष्कर्ष:
लोगों की मेहनत और पर्यावरण की अनदेखी कर जिस तरह पेड़ हटाए जा रहे हैं, उससे ना सिर्फ हरियाली खत्म हो रही है, बल्कि लोगों की नाराज़गी भी बढ़ती जा रही है। जेडीए को इस पर ध्यान देना होगा।
