तेल बेचकर भी एक रुपया खर्च नहीं करता नॉर्वे!
दुनिया का सबसे बड़ा वेल्थ फंड, 7 हजार कंपनियों में निवेश; क्या इसी वजह से नॉर्वे पहुंचे पीएम मोदी?
channel_009 | ग्लोबल इकोनॉमी स्पेशल
दुनिया में कई तेल उत्पादक देश हैं, लेकिन नॉर्वे का मॉडल सबसे अलग माना जाता है। यह देश तेल बेचकर कमाई तो अरबों डॉलर की करता है, लेकिन उस कमाई को सीधे खर्च नहीं करता। यही वजह है कि नॉर्वे आज दुनिया का सबसे बड़ा “सॉवरेन वेल्थ फंड” चलाता है, जिसकी चर्चा अब भारत में भी तेज हो गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नॉर्वे के इस सरकारी फंड ने दुनिया की करीब 7 हजार कंपनियों में हिस्सेदारी खरीद रखी है। टेक्नोलॉजी, बैंकिंग, हेल्थ, एनर्जी और ग्लोबल इंडस्ट्री की कई बड़ी कंपनियों में नॉर्वे का निवेश फैला हुआ है। इस फंड की कुल वैल्यू इतनी बड़ी मानी जाती है कि इसे दुनिया के सबसे ताकतवर निवेशकों में गिना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नॉर्वे सरकार तेल और गैस से होने वाली कमाई को सीधे सरकारी खर्च में नहीं लगाती। इसके बजाय वह रकम भविष्य के लिए इस फंड में जमा की जाती है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नॉर्वे दौरे को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि भारत और नॉर्वे के बीच निवेश, ग्रीन एनर्जी, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर सहयोग को लेकर बड़े स्तर पर बातचीत हो सकती है। कुछ विशेषज्ञ यह भी मान रहे हैं कि भारत नॉर्वे के वेल्थ फंड से निवेश आकर्षित करने की रणनीति पर काम कर सकता है।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि नॉर्वे का मॉडल दुनिया के लिए एक उदाहरण बन चुका है, जहां प्राकृतिक संसाधनों से हुई कमाई को भविष्य की आर्थिक ताकत में बदला गया।
अब सवाल यही है कि क्या भारत और नॉर्वे के बीच इस दौरे के बाद निवेश और आर्थिक साझेदारी का नया अध्याय शुरू होगा।

