सियोल:
कभी फैक्ट्री में मजदूरी करने वाले ली जे-म्यांग अब दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति बन गए हैं। बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले ली ने अपने जीवन में लंबा संघर्ष किया, मानवाधिकार वकील बने और फिर राजनीति में प्रवेश कर देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचे। यह जीत न सिर्फ राजनीतिक बदलाव का प्रतीक है, बल्कि करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा भी है।
कठिन हालात से राष्ट्रपति भवन तक का सफर
ली जे-म्यांग का जन्म 1963 में ग्योंगबुक प्रांत के एक पहाड़ी गांव में हुआ था। गरीबी के कारण उन्हें कम उम्र में ही फैक्ट्री में मजदूरी करनी पड़ी। लेकिन उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी और कड़ी मेहनत से वकालत की डिग्री हासिल की।
वकील बनने के बाद उन्होंने मानवाधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी और सामाजिक न्याय के मुद्दों को मजबूती से उठाया। यहीं से उनकी राजनीतिक यात्रा शुरू हुई।
पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग में बड़ी भूमिका
ली को उस समय राष्ट्रीय पहचान मिली जब उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल के खिलाफ चलाए गए महाभियोग अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई। इस वजह से उनकी पार्टी ने उन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया और अंततः जनता ने उन्हें भारी समर्थन दिया।
चुनाव में शानदार जीत, विरोधी ने मानी हार
मंगलवार देर रात जब करीब 95% वोटों की गिनती हो चुकी थी, तब ली को 48.86% वोट मिले जबकि उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी किम मून सू को केवल 41.98% वोटों से संतोष करना पड़ा। परिणाम घोषित होने से पहले ही किम ने अपनी हार स्वीकार करते हुए ली को बधाई दी।
नई सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां
ली के सामने देश के भीतर और बाहर कई बड़ी चुनौतियाँ होंगी। उत्तर कोरिया की परमाणु नीति, अमेरिका-चीन के बीच संतुलन, और देश की धीमी होती अर्थव्यवस्था जैसी समस्याओं से उन्हें जल्द ही निपटना होगा।
हालांकि पहले आलोचक उन्हें चीन और उत्तर कोरिया समर्थक मानते रहे हैं, लेकिन ली ने साफ किया है कि अमेरिका के साथ गठबंधन उनकी विदेश नीति की रीढ़ बना रहेगा।
‘नई शुरुआत का वक्त आ गया है’ – ली जे-म्यांग
अपनी जीत के बाद सियोल की सड़कों पर समर्थकों को संबोधित करते हुए ली ने कहा,
“हमें अब उम्मीद के साथ आगे बढ़ना है। यह वक्त है एक नई शुरुआत का।”
उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था सुधारने और उत्तर कोरिया के साथ शांति बहाली को अपनी प्राथमिकताएं बताया।
आज लेंगे राष्ट्रपति पद की शपथ
दक्षिण कोरिया में परंपरा के अनुसार, विजेता को बुधवार को ही शपथ दिलाई जाएगी। इसके बाद से ली देश की बागडोर संभाल लेंगे।

