देश में किफायती घरों की भारी कमी, लाखों हाउसिंग प्रोजेक्ट सालों से अधूरे
देश में सस्ते और किफायती घरों की कमी लगातार गंभीर होती जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 4.5 लाख हाउसिंग प्रोजेक्ट लंबे समय से अधूरे पड़े हैं, जिससे लाखों परिवारों का अपने घर का सपना अटका हुआ है। रियल एस्टेट सेक्टर में यह समस्या अब आर्थिक और सामाजिक चिंता का बड़ा विषय बनती जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और कम आय वाले परिवारों पर पड़ रहा है। कई लोगों ने वर्षों पहले फ्लैट बुक कराए थे, लेकिन प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं होने से उन्हें किराया और ईएमआई दोनों का बोझ उठाना पड़ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, देश के बड़े शहरों में किफायती आवास की मांग तेजी से बढ़ी है, लेकिन सप्लाई उस गति से नहीं बढ़ पाई। कई प्रोजेक्ट फंडिंग की कमी, कानूनी विवाद, निर्माण लागत बढ़ने और प्रशासनिक मंजूरियों में देरी के कारण अटके हुए हैं।
रियल एस्टेट बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि अधूरे प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं किए गए तो इससे निवेशकों और खरीदारों का भरोसा प्रभावित हो सकता है। वहीं निर्माण क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ रहा है।
सरकार की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना समेत कई योजनाओं के जरिए किफायती घर उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है that केवल नई योजनाएं शुरू करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पहले से अटके प्रोजेक्ट्स को पूरा कराना भी जरूरी है।
घर खरीदने वाले लोगों का कहना है कि वर्षों इंतजार करने के बावजूद उन्हें कब्जा नहीं मिला है। कई परिवार अब कानूनी लड़ाई लड़ने को मजबूर हैं। इस बीच रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की मांग भी तेज हो रही है।

