
क्या है पूरा मामला?
भूखंड संख्या 75-76 पर बिना पुनर्गठन कराए और शून्य सैटबेक पर चार मंजिला इमारत का निर्माण किया जा रहा था। करीब 333 वर्ग गज क्षेत्र में यह निर्माण लगभग पूरा हो चुका था।
दिसंबर में ही उच्च अधिकारियों ने इस निर्माण कार्य को रोकने के निर्देश दिए थे। लेकिन आरोप है कि प्रवर्तन अधिकारी ने आदेश की अनदेखी कर निर्माण कार्य जारी रहने दिया। बाद में दोबारा निरीक्षण में मामला सामने आया, जिसके बाद निलंबन की कार्रवाई की गई।
कैसे हुआ खुलासा?
6 दिसंबर को निर्माणाधीन इमारत एक तरफ झुक गई थी। 7 दिसंबर को जेडीए ने कार्रवाई करते हुए इमारत को ध्वस्त किया था। उस समय तत्कालीन उप पुलिस महानिरीक्षक राहुल कोटोकी ने निर्माण रुकवाकर दस्तावेजों की जांच के निर्देश दिए थे।
मामला शांत होने के बाद फिर से निर्माण शुरू कर दिया गया। शिकायत मिलने पर उच्च अधिकारियों को मौके पर भेजा गया। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी गई और निलंबन की कार्रवाई की गई।
आगे क्या होगा?
प्रवर्तन अधिकारी के निलंबन के बाद अब जेडीए निर्माणकर्ता के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। संभावना है कि अवैध इमारत को सील किया जाए। सूत्रों के अनुसार, निर्माणकर्ता ने कोर्ट से स्टे लेने की कोशिश भी की है।
जेडीए के महानिरीक्षक राहुल कोटोकी ने बताया कि शिकायत के बाद जांच कराई गई और रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
