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द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार जर्मन सेना की विदेशी तैनाती, लिथुआनिया में ‘बर्लिन ब्रिगेड’ की तैनाती में छिपा रूस फैक्टर

garman army

विलनियस/बर्लिन: जर्मनी ने इतिहास में एक बड़ा मोड़ लेते हुए द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार अपनी सेना को स्थायी रूप से किसी अन्य देश में तैनात किया है। चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने लिथुआनिया में एक नई बख्तरबंद ब्रिगेड का उद्घाटन किया, जिसे “बर्लिन ब्रिगेड” नाम दिया गया है।

यह तैनाती नाटो के पूर्वी मोर्चे को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है, जो विशेष रूप से रूस और बेलारूस जैसे पड़ोसी खतरों को देखते हुए की गई है।


रूस की आक्रामकता ने बदला सुरक्षा समीकरण

2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए व्यापक हमले के बाद से नाटो सदस्य देशों में सुरक्षा चिंताएं गहरी हुई हैं। इसी पृष्ठभूमि में जर्मनी ने यह ऐतिहासिक कदम उठाया है। चांसलर मर्ज ने इसे “हमारी सुरक्षा, हमारी ज़िम्मेदारी” बताते हुए कहा कि बाल्टिक राष्ट्रों की रक्षा जर्मनी की भी प्राथमिकता है।

उन्होंने नाटो सहयोगियों से मॉस्को की आक्रामक नीतियों के विरुद्ध यूरोपीय सुरक्षा ढांचे को सशक्त करने की अपील की।


लिथुआनिया के राष्ट्रपति ने इसे बताया ‘ऐतिहासिक क्षण’

लिथुआनिया के राष्ट्रपति गितानस नौसेदा ने बर्लिन ब्रिगेड की तैनाती को एक “ऐतिहासिक दिन” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल जर्मन प्रतिबद्धता का प्रतीक है, बल्कि यह यूरोपीय रक्षा सहयोग को भी एक नई दिशा देता है।

लिथुआनिया की सीमा रूसी एन्क्लेव कलिनिनग्राद और बेलारूस से लगती है, जिससे यह रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।


क्या है बर्लिन ब्रिगेड?


रक्षा खर्च और रणनीतिक निवेश

जर्मन सरकार ने हाल के वर्षों में अपने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण पर भारी निवेश शुरू किया है। 2022 में तत्कालीन चांसलर ओलाफ शोल्ज़ ने रक्षा बजट को GDP के 2% तक बढ़ाने का ऐलान किया था, और 113 अरब डॉलर का एक विशेष रक्षा कोष भी स्थापित किया गया था।

इसी तरह, लिथुआनिया ने 2026 से अपने रक्षा खर्च को GDP के 5% से अधिक तक बढ़ाने की योजना बनाई है, जो उसकी सुरक्षा चिंताओं को दर्शाता है।


निष्कर्ष: बदलती दुनिया में जर्मनी की नई भूमिका

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी एक शांतिपूर्ण और घरेलू रक्षा नीति का पालन करता आया है, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध ने वैश्विक सुरक्षा समीकरणों को बदल दिया है। लिथुआनिया में जर्मन सैनिकों की यह स्थायी तैनाती दिखाती है कि जर्मनी अब सिर्फ आर्थिक महाशक्ति नहीं, बल्कि सुरक्षा और सामरिक जिम्मेदारी निभाने को भी तैयार है।

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