
किसानों ने बताया कि बोयाखेड़ा माइनर के आखिरी हिस्से में पानी नहीं पहुंच रहा है और माइनर सूखा पड़ा है। इसके कारण करीब दो हजार बीघा खेत बिना नहरी पानी के सूखे पड़े हैं, जिससे किसानों को पलेवा के लिए पानी का इंतजार करना पड़ रहा है।
सरपंच रामलाल गुर्जर ने बताया कि रोटेदा माइनर, देवली, ढ़ीकोली, झरण्या और अन्य गांवों में नहरी पानी नहीं पहुंचने के कारण बुआई में देरी हो रही है। किसान सुरेंद्र गुर्जर ने कहा कि वे सूखे खेतों में गेहूं की बुआई तो कर रहे हैं, लेकिन नहरी पानी आने के बाद ही सही तरीके से बुआई करने की उम्मीद थी, ताकि बुआई के अगले दिन खेतों में पानी दिया जा सके।
किसानों का कहना है कि माइनर की सफाई नहीं की गई थी, जिसके कारण पानी टेल तक नहीं पहुंच पा रहा है। साथ ही ऊपर के हिस्सों में अवरोध भी लगाए गए हैं, जिससे पानी की गति धीमी हो गई है। किसान सीएडी प्रशासन से नियमित निगरानी और अवरोध हटाने की मांग कर रहे हैं।
नहर की सफाई न होने से भी बढ़ रही समस्या
आकोदा: गुढ़ा बांध की मुख्य बायीं नहर में पानी छोड़ दिया गया है, लेकिन नहर की स्थिति का सही से जायजा नहीं लिया गया है। सियाणा में नहर में झाड़-झंझाड़ फंसे हुए हैं और बंबूलों की भरमार है। ऐसे में अगर नहर में पानी आता है, तो ओवरफ्लो होने की संभावना है, जिससे किसानों की कृषि कार्य में विलंब हो सकता है।
ग्रामीण लादु ने बताया कि नहर के वेस्टवेयर पानी की निकासी नहीं हो रही है, जिससे किसानों ने नहर को मिट्टी डालकर रोक दिया है। अगर पानी टेल तक पहुंचता है, तो खेतों में पानी भरने की संभावना है।
