ब्रुसेल्स:
नाटो में रक्षा खर्च बढ़ाने की मांग पूरी करने के बाद अब यूरोपीय संघ (EU) की नजरें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्यापारिक समझौते पर हैं — और समय तेजी से खत्म हो रहा है।
अगर 9 जुलाई तक कोई समझौता नहीं होता, तो अमेरिका EU की अधिकांश वस्तुओं पर भारी शुल्क लागू कर सकता है, जिससे यूरोप की अर्थव्यवस्था को गंभीर झटका लग सकता है।
यूरोपीय आयोग, जो EU की व्यापार नीति देखता है, बीते कई हफ्तों से अमेरिका के साथ बातचीत में लगा है। EU की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं — फ्रांस और जर्मनी — अब चाहते हैं कि ब्रुसेल्स तेजी से कोई रास्ता निकाले।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा,
“फ्रांस चाहता है कि जल्दी समझौता हो, यह प्रक्रिया अनिश्चितकाल तक न चले। लेकिन हम किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे।”
वहीं जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ का रुख थोड़ा अधिक लचीला रहा:
“ज्यादा जटिलता की बजाय, हम तेज़ और सरल रास्ता चुनें — भले ही थोड़ा असंतुलन हो।”
‘स्विस चीज़’ समझौते का सुझाव
राजनयिकों के अनुसार, मौजूदा रणनीति यह है कि ट्रंप को एक राजनीतिक जीत मिल जाए — लेकिन यूरोपीय उद्योगों को ज्यादा नुकसान न हो।
एक “स्विस चीज़” मॉडल की बात की जा रही है — यानी एक ऐसा समझौता जिसमें सतही तौर पर अमेरिका शुल्क लगाए, लेकिन अंदरखाने पर्याप्त छूट और अपवाद (loopholes) हों ताकि प्रमुख क्षेत्र जैसे स्टील, ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल्स और एयरोस्पेस सुरक्षित रह सकें।
इस तरह का समझौता मौजूदा हालात से बेहतर होगा, जहां यूरोपीय कंपनियों पर अमेरिका पहले ही स्टील, एल्युमीनियम और ऑटो सामान पर 25% टैक्स और अन्य उत्पादों पर 10% टैक्स लगा चुका है।
ब्रसेल्स में डिनर और रणनीति की कसौटी
गुरुवार को यूरोपीय नेताओं के रात्रिभोज में यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लायन ने नेताओं से उनकी “रेड लाइन” जानने की कोशिश की — ताकि अमेरिका से बातचीत के अंतिम दौर में समझौते की गुंजाइश बन सके।
अगर कोई सहमति नहीं बनी, तो अमेरिकी टैक्स दरें 20% या उससे भी अधिक हो सकती हैं। ट्रंप ने पहले 50% तक शुल्क की धमकी दी थी।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि जुलाई की डेडलाइन को बढ़ाया जा सकता है, लेकिन यह निर्णय ट्रंप खुद लेंगे।
EU की रणनीति: संयम, लेकिन तैयारी पूरी
जहां कनाडा और चीन जैसे देश ट्रंप की टैरिफ नीति पर तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हैं, वहीं EU ने अब तक संयम बरता है। लेकिन EU नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि बातचीत विफल रही, तो वे $100 बिलियन यूरो तक के अमेरिकी सामान पर जवाबी शुल्क लगाएंगे — जिनमें कारें और विमान भी शामिल हैं।
बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डे वेवर ने कहा:
“हम उकसावे में नहीं आएंगे, लेकिन जरूरत पड़ी तो हम भी जवाब देंगे।”
ट्रंप से कैसे निपटे यूरोप? मतभेद गहराते
EU में ट्रंप को लेकर मतभेद हैं। हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन और इटली की जॉर्जिया मेलोनी खुले तौर पर ट्रंप के समर्थक हैं, जबकि फ्रांस और नीदरलैंड जैसे देश अधिक सतर्क हैं।
ऑर्बन ने कहा:
“अमेरिका की तरफ से हमारे पास एक अनुभवी डीलमेकर है, लेकिन EU की तरफ से नेतृत्व कमजोर और बंटा हुआ है।”
डिजिटल नियम: अगला टकराव?
संयुक्त राज्य अमेरिका EU के डिजिटल नियमों — जैसे डेटा गोपनीयता, प्रतिस्पर्धा कानून और AI रेगुलेशन — को लेकर भी छूट चाहता है। अमेरिका का मानना है कि ये नियम Apple, Google और Meta जैसी कंपनियों के खिलाफ भेदभावपूर्ण हैं।
EU ने यह स्पष्ट किया है कि वह ट्रांस-अटलांटिक डिजिटल मानकों पर बातचीत को तैयार है, लेकिन अपने डिजिटल नियमों को छेड़ने नहीं देगा। यह ब्रुसेल्स के लिए “रेड लाइन” है।
निष्कर्ष: समय कम, दांव ऊंचा
जैसे-जैसे 9 जुलाई नजदीक आ रहा है, यूरोप और अमेरिका के बीच आर्थिक टकराव और समझौते दोनों की संभावना बनी हुई है। दोनों पक्ष जानते हैं कि कोई भी व्यापार युद्ध दोनों के लिए नुकसानदेह होगा — पर सवाल यही है: क्या ट्रंप को ‘जीत’ का अहसास दिलाकर EU खुद को बचा पाएगा?

