राजस्थान निकाय चुनाव के नतीजों के बाद कई नगर निकायों में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम हो गई है। जहां किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन निर्णायक साबित हो सकता है।
चुनाव परिणामों के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने बोर्ड बनाने के लिए पार्षदों के समीकरण साधने में जुटी हैं। कई निकायों में निर्दलीय पार्षदों से संपर्क और समर्थन जुटाने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
अब मेयर, सभापति और अध्यक्ष पद के चुनाव में स्थानीय राजनीतिक समीकरण, आपसी सहमति और समर्थन की रणनीति महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

