
नोएडा से करेंगे चुनावी अभियान की शुरुआत
अखिलेश यादव 28 मार्च को नोएडा से अपने चुनाव अभियान की शुरुआत करेंगे। इस मौके पर वह PDA भागीदारी रैली का आयोजन करेंगे। सपा के लिए नोएडा हमेशा से चुनौतीपूर्ण क्षेत्र रहा है, क्योंकि 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां भाजपा ने सभी सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसी वजह से अखिलेश यादव ने इस बार नोएडा को खास तौर पर चुना है।
PDA रैली के जरिए साधेंगे बड़ा वोट बैंक
इस रैली के जरिए अखिलेश यादव पिछड़े वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) समुदाय को एकजुट करने की कोशिश करेंगे। सपा की रणनीति है कि पश्चिमी यूपी में इन वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत की जाए।
पश्चिमी यूपी की अहम भूमिका
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट और गुर्जर समुदाय की बड़ी आबादी है। इस क्षेत्र में कुल 14 लोकसभा सीटें हैं। अलग-अलग समय पर गुर्जर समुदाय के सांसद इन में से सात सीटों का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, जिनमें गौतम बुद्ध नगर, मेरठ, बागपत, अमरोहा, कैराना, सहारनपुर और बिजनौर शामिल हैं।
2012 की यादें और नोएडा से जुड़ा अंधविश्वास
साल 2012 में अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव से पहले अपनी साइकिल यात्रा की शुरुआत गौतम बुद्ध नगर से की थी और बाद में सत्ता में आए थे। हालांकि मुख्यमंत्री बनने के बाद वे अपने पूरे कार्यकाल में कभी नोएडा या ग्रेटर नोएडा नहीं गए। इसके पीछे एक अंधविश्वास बताया जाता है कि जो मुख्यमंत्री नोएडा जाता है, वह छह महीने के भीतर सत्ता से बाहर हो जाता है।
अब 2027 के चुनाव से पहले अखिलेश यादव खुद नोएडा से अभियान शुरू कर रहे हैं, जिसे सपा की नई और बदली हुई रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
