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पचपदरा रिफाइनरी रेल कनेक्शन पर विवाद: पुराना रूट छोड़कर नया प्रस्ताव क्यों रोक रहा काम

राजस्थान में पचपदरा रिफाइनरी को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने की योजना विवादों में फंस गई है। विवाद मुख्य रूप से पुराने ट्रैक और नए प्रस्तावित रूट को लेकर है।

क्या है विवाद:

  • क्षेत्रीय विधायक डॉ. अरुण चौधरी ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को तिलवाड़ा से नई पटरी बिछाकर पचपदरा तक रेल चलाने का प्रस्ताव दिया।
  • लेकिन पचपदरा, मंडापुरा, सांभरा और आसपास के ग्रामीण इस नए रूट का विरोध कर रहे हैं।

पुराना रूट बनाम नया रूट:

  • पुराने समय में बालोतरा से पचपदरा तक सीधी रेल लाइन थी।
  • ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे के पास पहले से ही जमीन है, लेकिन वहां अब अवैध निर्माण और कब्जा हो चुका है।
  • प्रशासन नई लाइन बनाने का प्रयास कर रहा है, जिससे मुआवजा और किसानों की जमीन का नुकसान बढ़ेगा।

ग्रामीणों की आपत्ति:

  • नया रूट अपनाने से भू-माफियाओं को फायदा होगा और सरकारी धन बर्बाद होगा।
  • नमक उत्पादन और कृषि भूमि प्रभावित होगी, जिससे सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर असर पड़ेगा।
  • किसानों और स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि पुरानी आरक्षित भूमि पर रेल लाइन बिछाना सही रहेगा।

सरकारी संपत्ति की अनदेखी:

  • पुराने ट्रैक की जमीन पर नई लाइन न बनाकर तिलवाड़ा से नया रूट प्रस्तावित करना रेलवे की करोड़ों की संपत्ति को अतिक्रमियों के हवाले करने जैसा है।

ग्रामीण और स्थानीय प्रशासन की मांग है कि पुरानी बालोतरा-पचपदरा लाइन की जमीन का उपयोग करके रेल कनेक्शन बनाया जाए, ताकि विवाद और नुकसान दोनों कम हों।

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