रियाद/वाशिंगटन: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस सप्ताह पश्चिम एशिया के रणनीतिक दौरे पर हैं, जहां वे सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का दौरा करेंगे। इस दौरे की शुरुआत वे सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात के साथ करेंगे।
दौरे के मुख्य एजेंडे क्या हैं?
इस बहुचर्चित यात्रा के दौरान ट्रंप तीन प्रमुख मुद्दों पर बात करेंगे:
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गाजा पट्टी में युद्धविराम: इजरायल और हमास के बीच जारी संघर्ष के चलते गाजा में हालात बेहद खराब हैं। खाद्य और चिकित्सा आपूर्ति पर पाबंदियों ने वहां गंभीर मानवीय संकट को जन्म दिया है।
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ईरान का परमाणु कार्यक्रम: रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान परमाणु हथियारों के करीब पहुंच रहा है, जिससे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता का खतरा बढ़ गया है।
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तेल की वैश्विक कीमतें: खाड़ी देशों की भूमिका वैश्विक तेल आपूर्ति में अहम है और अमेरिका इन देशों से ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने की अपेक्षा कर रहा है।
खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) की बैठक भी तय
सऊदी अरब में ट्रंप की मेज़बानी के तहत खाड़ी सहयोग परिषद (Gulf Cooperation Council) की एक अहम बैठक भी आयोजित होगी। इस परिषद में सऊदी अरब, कतर, बहरीन, ओमान, कुवैत और यूएई जैसे देश शामिल हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक में सामूहिक सुरक्षा, तेल उत्पादन और क्षेत्रीय सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा होगी।
कारोबार के एंगल से भी जुड़ी है यह यात्रा
दिलचस्प बात यह है कि जिन तीन देशों की यात्रा ट्रंप कर रहे हैं, वहां ट्रंप ऑर्गनाइजेशन—जिसे उनके बेटों द्वारा संचालित किया जाता है—की बड़ी रियल एस्टेट परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें जेद्दा में एक गगनचुंबी इमारत, दुबई में एक लग्जरी होटल, और कतर में एक गोल्फ कोर्स और विला प्रोजेक्ट शामिल हैं।
क्यों अहम है यह दौरा?
ट्रंप की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में राजनयिक और सैन्य तनाव अपने चरम पर हैं। अमेरिका अपनी प्रभावशीलता बनाए रखना चाहता है और साथ ही वहां चल रही रियल एस्टेट परियोजनाओं के हितों की रक्षा भी।

