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पश्चिम बंगाल के सभी मदरसों में ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य:गोहत्या पर बैन, CAA लागू और BSF फेंसिंग होगी; 12 दिन में सरकार के 12 फैसले

पश्चिम बंगाल में सरकार के 12 बड़े फैसले, मदरसों में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य करने का ऐलान

पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद लगातार बड़े फैसलों का सिलसिला जारी है। सरकार ने 12 दिनों के अंदर 12 अहम फैसले लिए हैं, जिनमें मदरसों में ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य करना, गोहत्या पर रोक, CAA लागू करने और BSF फेंसिंग से जुड़े कदम शामिल बताए जा रहे हैं।

सरकार का कहना है कि ये फैसले राज्य में कानून व्यवस्था, राष्ट्रभावना और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से लिए गए हैं। प्रशासनिक स्तर पर संबंधित विभागों को निर्देश जारी किए जा रहे हैं, ताकि फैसलों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सके।

मदरसों में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य

सबसे ज्यादा चर्चा मदरसों से जुड़े फैसले की हो रही है। सरकार ने सभी मदरसों में प्रार्थना या सभा के दौरान ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य करने की बात कही है। सरकार का दावा है कि इससे छात्रों में देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना मजबूत होगी।

हालांकि, इस फैसले को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो सकती है। विपक्ष इसे धार्मिक संस्थानों में सरकारी दखल बता सकता है, जबकि सरकार इसे राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा कदम बता रही है।

गोहत्या पर बैन का फैसला

सरकार ने राज्य में गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए कानून और प्रशासनिक प्रक्रिया को मजबूत करने की बात कही जा रही है। सरकार का कहना है कि पशु संरक्षण और सामाजिक भावनाओं को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

CAA लागू करने की तैयारी

नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA को लागू करने को लेकर भी सरकार सक्रिय नजर आ रही है। सरकार का कहना है कि पात्र लोगों को नागरिकता प्रक्रिया में मदद दी जाएगी और किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रम फैलाने वालों पर नजर रखी जाएगी।

BSF फेंसिंग पर जोर

सीमा सुरक्षा को लेकर भी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। भारत-बांग्लादेश सीमा से जुड़े इलाकों में BSF फेंसिंग और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही गई है। सरकार का मानना है कि इससे घुसपैठ, तस्करी और सीमा पार अपराधों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

12 दिन में 12 फैसलों से सियासत तेज

सरकार के इन फैसलों के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। सत्ता पक्ष इसे “बदलाव की शुरुआत” बता रहा है, वहीं विपक्ष इन फैसलों को ध्रुवीकरण की राजनीति से जोड़ सकता है।

आने वाले दिनों में इन फैसलों के लागू होने की प्रक्रिया और इन पर जनता की प्रतिक्रिया राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकती है। फिलहाल पश्चिम बंगाल में सरकार के लगातार फैसलों ने राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गर्म कर दिया है।

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