Site icon CHANNEL009

पाकिस्तान में हिंदू धार्मिक स्थलों पर संकट: कराची के पास 100 साल पुराने मंदिर पर अवैध कब्जे की घटना सामने आई

old temple in karachi

A view of Ambika Mata Temple which is one of the oldest Hindu temple of Karachi. The yatris leaving for Hinglaj Pilgrimage, traditionally start their travel from the very place in Karachi.

कराची/इस्लामाबाद: पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय के विरासत स्थलों को लेकर चिंता एक बार फिर गहराती जा रही है। सिंध प्रांत के टांडो जाम क्षेत्र के समीप स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर पर हाल ही में अवैध कब्जे और निर्माण कार्य की खबर ने देश और विदेश में प्रतिक्रिया उत्पन्न की है।

जानकारी के अनुसार, कराची से करीब 185 किलोमीटर दूर मूसा खटियन गांव में स्थित यह मंदिर लगभग एक सदी पुराना है और स्थानीय हिंदू समुदाय के लिए गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। अब आरोप है कि कुछ प्रभावशाली स्थानीय लोगों ने मंदिर की ज़मीन पर कब्जा कर लिया है और वहां निर्माण कार्य शुरू कर दिया है।

हिंदू संगठनों ने जताई कड़ी नाराजगी

इस घटनाक्रम पर ‘दरावर इत्तेहाद पाकिस्तान’ के प्रमुख शिव काच्छी ने सोशल मीडिया के माध्यम से वीडियो जारी कर पूरे मामले की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कब्जे के बाद मंदिर की ओर जाने वाला रास्ता भी अवरुद्ध कर दिया गया है, जिससे श्रद्धालुओं की नियमित पूजा और भजन-कीर्तन की व्यवस्था बाधित हो रही है।

काच्छी ने बताया कि मंदिर की देखरेख एक स्थानीय समिति करती थी और पिछले वर्ष सिंध विरासत विभाग ने मंदिर का आंशिक जीर्णोद्धार भी करवाया था, जिससे इसका ऐतिहासिक महत्व और स्पष्ट होता है। मंदिर से सटी शमशान भूमि पर भी अतिक्रमण की आशंका जताई जा रही है, जिससे समुदाय की धार्मिक गतिविधियां और आस्था प्रभावित हो रही हैं।

सरकार से त्वरित हस्तक्षेप की मांग

शिव काच्छी ने पाकिस्तान सरकार से अपील करते हुए कहा, “इस मंदिर और उससे जुड़ी भूमि की पवित्रता और संरचना की रक्षा सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। हम मांग करते हैं कि अवैध निर्माण तत्काल रोका जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो।”

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पाकिस्तान में हिंदू और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के विरुद्ध धार्मिक उत्पीड़न और संपत्तियों पर अतिक्रमण की घटनाएं बार-बार उजागर हो रही हैं। मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इस पर चिंता जताई है और पाकिस्तान सरकार से अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

Exit mobile version