
कौन-कौन पाए गए दोषी?
जांच में बीईओ राणा प्रताप सिंह, कंप्यूटर ऑपरेटर बालेंद्र द्विवेदी, लिपिक अशोक धनखड़ और शिक्षक धीरेंद्र गुप्ता को दोषी पाया गया है। इन लोगों ने मिलकर सरकारी राशि का फर्जी तरीके से आहरण किया।
क्या हुई कार्रवाई?
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कंप्यूटर ऑपरेटर बालेंद्र द्विवेदी की नौकरी समाप्त कर दी गई है।
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शिक्षक रामबिहारी पांडेय और लिपिक अशोक धनखड़ को सस्पेंड किया गया है।
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बीईओ राणा प्रताप सिंह को निलंबित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
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सभी के खिलाफ एफआईआर कराने की सिफारिश की गई है।
फर्जी खातों में डाला पैसा
जांच में सामने आया कि यह घोटाला 2018 से 2023 के बीच हुआ। आरोपी अधिकारियों ने अतिथि शिक्षकों और मजदूरों के नाम पर फर्जी बिल बनाकर, पैसा अपने परिवार के खातों में ट्रांसफर किया।
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कुल 24 संदिग्ध खातों की जांच हुई, जिनमें से 21 खाते आरोपियों के रिश्तेदारों के नाम पर हैं — जैसे बेटा, पत्नी आदि।
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2.15 करोड़ रुपये की राशि वापस सरकारी खाते में जमा भी कर दी गई है, ताकि कार्रवाई से बचा जा सके।
अब आगे क्या होगा?
कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन ने कहा कि पूरा मामला जांच के बाद अपराध दर्ज कराया जाएगा और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की गंभीर जरूरत को फिर से उजागर करता है।
