
टीम में जगह नहीं मिलने से हुए थे निराश
एक इंटरव्यू में जितेश शर्मा ने कहा कि जब उन्हें पता चला कि उनका चयन टी20 वर्ल्ड कप टीम में नहीं हुआ है, तो वह निराश हुए थे। उन्होंने कहा कि यह स्वाभाविक है, क्योंकि हर खिलाड़ी बड़े टूर्नामेंट में खेलना चाहता है। हालांकि समय के साथ यह निराशा कम होती चली गई।
पिता की बीमारी और निधन ने बदल दी सोच
जितेश ने बताया कि इसी दौरान उनके पिता मोहन शर्मा बीमार पड़ गए और 1 फरवरी को उनका निधन हो गया। वह लगभग सात दिनों तक अपने पिता के साथ रहे। इस अनुभव ने उन्हें यह महसूस कराया कि उस समय वर्ल्ड कप से ज्यादा उनके पिता को उनकी जरूरत थी।
उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का सुकून है कि उन्हें अपने पिता के साथ कुछ समय बिताने और उनका ख्याल रखने का मौका मिला।
घर पर बैठकर देखा वर्ल्ड कप
जितेश शर्मा ने कहा कि उन्होंने घर पर टीवी पर वर्ल्ड कप देखा। उन्होंने बताया कि बाहर से मैच देखना एक अलग अनुभव होता है। जब आप मैदान में नहीं होते, तो मैच देखते समय ज्यादा तनाव महसूस होता है। उन्होंने टीम के खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर खुशी भी जताई।
अब परिवार की जिम्मेदारी
पिता के निधन के बाद अब परिवार की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर आ गई है। जितेश ने कहा कि बड़े बेटे होने के नाते अब उन्हें अपनी मां, भाई और पूरे परिवार का ख्याल रखना है।
उन्होंने कहा कि वह अपने परिवार के सामने अपनी भावनाएं ज्यादा नहीं दिखाते, क्योंकि वह उन्हें मजबूत देखना चाहते हैं।
पिता को नहीं भूल सकते
जितेश का कहना है कि पिता को खोने का दर्द धीरे-धीरे महसूस होता है और यह खालीपन हमेशा बना रहता है। उन्होंने कहा कि उनके दिल का एक हिस्सा हमेशा के लिए खाली हो गया है और वह इसे कभी नहीं भूल पाएंगे।
उन्होंने अपने पिता को अपनी जिंदगी का हीरो बताया और कहा कि अगर उनके पिता आज जिंदा होते तो शायद उनसे कहते कि मेहनत करते रहो और आगे बढ़ो।
रिंकू सिंह का भी किया जिक्र
जितेश शर्मा ने भारतीय टीम के खिलाड़ी रिंकू सिंह का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत मुश्किलों के बाद मैदान पर वापसी करना आसान नहीं होता। उनके मुताबिक रिंकू सिंह ने भी ऐसे हालात का सामना किया है और फिर से मैदान पर लौटना बड़ी बात होती है।
