
परिजनों का आरोप है कि राजेश की मौत आत्महत्या नहीं, बल्कि पुलिस की मारपीट से हुई है। उनका कहना है कि संबंधित पुलिसकर्मियों पर हत्या का मामला दर्ज किया जाए। फिलहाल दोनों आरक्षकों को सस्पेंड कर दिया गया है और थाने में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
शनिवार शाम करीब 5 बजे राजनगर थाने के महिला सेल के वॉशरूम में राजेश का शव फंदे से लटका मिला था। उसी दिन सुबह करीब 10 बजे दो पुलिसकर्मी, संजय कुमावत और शिवकुमार पाल, राजेश को उसके घर से थाने ले गए थे।
परिजनों का कहना है कि राजेश पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन पुलिसकर्मियों ने उसे पकड़ा, उनमें से एक ड्यूटी पर भी नहीं था।
घटना की सूचना मिलते ही एसपी और मजिस्ट्रेट मौके पर पहुंचे। एफएसएल टीम ने जांच शुरू कर दी है और मामले की मजिस्ट्रेट जांच चल रही है।
रिश्वत मांगने का आरोप
मृतक के चाचा बाबूलाल पटेल ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने राजेश को छोड़ने के लिए एक लाख रुपये की मांग की थी, जो बाद में 50 हजार रुपये पर तय हुई। परिजनों का कहना है कि जब वे पैसे लेकर पहुंचे, तब भी पुलिस ने रकम लेने से इनकार कर दिया और बाद में राजेश की मौत की सूचना दी गई।
परिजनों का यह भी कहना है कि राजेश के शरीर पर चोट के निशान थे, जो पोस्टमार्टम के दौरान भी दिखाई दिए।
पोस्टमार्टम और जांच
दोपहर करीब दो बजे परिजन पोस्टमार्टम के लिए तैयार हुए। डॉक्टरों के एक पैनल ने न्यायाधीश और परिजनों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम किया। हालांकि, पोस्टमार्टम के बाद भी परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया और आरोपी पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग दोहराई।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने घटना की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। दो जजों की मौजूदगी में घटनास्थल की वीडियोग्राफी भी कराई गई है।
विधायक ने किया दौरा
राजनगर विधायक ने अस्पताल पहुंचकर मृतक के परिवार से मुलाकात की और हर संभव मदद का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद सच्चाई सामने आएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।
इस घटना के बाद इलाके में पुलिस व्यवस्था और हिरासत में सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
