ड्नीप्रोपेट्रोव्स्क, यूक्रेन | 13 जून 2025:
तीन सालों के युद्ध के बाद पहली बार रूसी सेनाएं पूर्वी यूक्रेन के ड्नीप्रोपेट्रोव्स्क क्षेत्र में दाखिल हो गई हैं। यह कदम न केवल जमीनी लड़ाई के विस्तार का संकेत देता है, बल्कि यह दर्शाता है कि रूस युद्धविराम वार्ताओं की धीमी प्रगति के बावजूद आक्रामक अभियान जारी रखने में सक्षम है।
यूक्रेनी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, रूसी सैनिकों के छोटे-छोटे दस्ता बीते सप्ताहांत डोनेट्स्क क्षेत्र से पश्चिम की ओर बढ़ते हुए ड्नीप्रोपेट्रोव्स्क में घुसे। वॉशिंगटन स्थित Institute for the Study of War द्वारा जारी नवीनतम युद्ध मानचित्रों में इस घुसपैठ की पुष्टि की गई है।
हालांकि रूसी सेना ने इस क्षेत्र पर कब्जा करने का अब तक कोई संकेत नहीं दिया है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम प्रतीकात्मक और सामरिक दोनों है—यूक्रेनी मनोबल को चोट पहुँचाना और डोनेट्स्क में अपने बचाव को मजबूत करना।
यूक्रेनी बलों की प्रतिक्रियाएं और स्थानीय हालात
यूक्रेनी 72वीं ब्रिगेड के अधिकारी “बारबरोसा” के अनुसार, “रूसी बलों की बड़ी संख्या इस इलाके में एकत्रित हो चुकी है और उनकी मंशा और गहराई तक बढ़ने की है।”
फिलहाल रूसी सेना कुछ पेड़-पंक्तियों तक ही घुसी है और अभी तक किसी बड़ी बस्ती पर कब्जा नहीं किया है। परंतु रणनीतिक दृष्टि से यह क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण है। ड्नीप्रोपेट्रोव्स्क न केवल यूक्रेन का एक प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है, बल्कि लगभग 30 लाख नागरिकों का घर भी है—जिनमें से कई पहले ही डोनेट्स्क से विस्थापित होकर यहां आए थे।
रणनीतिक लक्ष्य: डोनेट्स्क में पूर्ण नियंत्रण की दिशा में कदम
डोनेट्स्क का लगभग 70% क्षेत्र पहले ही रूसी कब्ज़े में है। विश्लेषकों का मानना है कि ड्नीप्रोपेट्रोव्स्क की सीमा तक नियंत्रण हासिल करना रूस को पोक्रोव्स्क जैसे बचे हुए यूक्रेनी ठिकानों पर निर्णायक हमला करने का अवसर दे सकता है।
यूक्रेनी सैनिक विक्टर के अनुसार, रूसी सेना पहले नोवोपावलिव्का पर कब्जा करने की कोशिश कर सकती है, जो ऊंचाई पर स्थित एक रणनीतिक कस्बा है। इसके बाद रूसी सेना संभवतः मेझोवा की ओर बढ़ेगी। यह इलाका रूस को डोनेट्स्क में अपने मोर्चों की सुरक्षा के लिए लगभग 10 किलोमीटर गहरी बफर ज़ोन बनाने में मदद करेगा।
नवीन रूसी रणनीति: छोटे समूहों में आगे बढ़ना
रूस ने पिछले वर्ष की तुलना में अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। बखमुत जैसी लड़ाइयों में भारी नुकसान उठाने के बाद अब वह छोटे-छोटे हमलावर दस्तों के ज़रिए यूक्रेनी सुरक्षा में सेंध लगाने की रणनीति अपना रहा है।
72वीं ब्रिगेड के सैनिक बताते हैं, “रूसी दस्ते अब दो से छह सैनिकों के समूह में, पेड़ की लाइनों या इमारतों की आड़ में धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं।”
स्वास्थ्य सेवाएं और मानवीय असर
यूक्रेनी 33वीं मैकेनाइज़्ड ब्रिगेड के स्वास्थ्यकर्मी, जो मोर्चे से कुछ किलोमीटर पीछे फील्ड हॉस्पिटल संचालित करते थे, अब तक चार बार अपने ठिकाने पीछे खिसका चुके हैं। हाल ही में जिस इमारत में वे नोवोपावलिव्का में सेवा दे रहे थे, वह रूसी हमले में क्षतिग्रस्त हो गई।
निष्कर्ष:
ड्नीप्रोपेट्रोव्स्क में रूसी घुसपैठ युद्ध के दायरे को और भी बड़ा बना रही है। यह कदम केवल सैन्य नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है—विशेषकर ऐसे समय में जब युद्धविराम वार्ताएं धीमी गति से चल रही हैं। इस क्षेत्र में कोई बड़ी सफलता रूस को संभावित वार्ताओं में अतिरिक्त दबाव की स्थिति दे सकती है।

