पेरिस: फ्रांस ने एक ऐतिहासिक दिशा में कदम बढ़ाते हुए उन लोगों को ‘मौत चुनने’ का विकल्प देने वाला विधेयक पारित किया है, जो गंभीर और लाइलाज रोगों से पीड़ित हैं। फ्रांसीसी संसद के निचले सदन (नेशनल असेंबली) में यह बिल मंगलवार को पारित किया गया, जिसे एक महत्वपूर्ण सामाजिक और नैतिक निर्णय माना जा रहा है।
विधेयक को मिला व्यापक समर्थन
इस संवेदनशील और लंबे समय से चर्चा में रहे प्रस्ताव को नेशनल असेंबली में 305 सदस्यों का समर्थन, जबकि 199 सदस्यों का विरोध मिला। अब यह बिल सीनेट में भेजा जाएगा, जहाँ आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे कानून का रूप दिया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अंतिम मंजूरी में अभी कुछ महीने लग सकते हैं।
बिल में शामिल हैं कड़े मानदंड
यह विधेयक उन मरीजों को जीवन समाप्त करने की अनुमति देता है, जो निम्नलिखित शर्तों को पूरा करते हों:
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मरीज की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए।
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मरीज या तो फ्रांस का नागरिक हो या फ्रांस में कानूनी रूप से स्थायी निवासी हो।
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एक चिकित्सकीय पैनल द्वारा यह पुष्टि की जाए कि व्यक्ति गंभीर, लाइलाज और असहनीय पीड़ा देने वाली बीमारी से ग्रसित है।
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व्यक्ति को पूरी तरह से मानसिक रूप से सक्षम और अपनी इच्छा से निर्णय लेने योग्य होना चाहिए।
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अल्जाइमर या अन्य न्यूरोलॉजिकल विकारों से ग्रसित गंभीर मानसिक रोगियों को इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा।
उद्देश्य: पीड़ा को कम करना और गरिमा की रक्षा
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इस विधेयक का उद्देश्य आत्महत्या को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि उन मरीजों को राहत देना है जो लगातार दर्द और लाचारगी में जी रहे हैं। साथ ही, पीड़ा रहित देखभाल और मरीजों की गरिमा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक और संबंधित विधेयक भी पारित किया गया है।
यूरोप में euthanasia पर बहस को मिल सकती है नई दिशा
फ्रांस में यह विधेयक ऐसे समय में पारित हुआ है जब यूरोप के कई देश कानूनी रूप से assisted dying या euthanasia को लेकर सक्रिय बहस कर रहे हैं। फ्रांस में इस कदम को सामाजिक न्याय और मानवीय करुणा के पहलू से देखा जा रहा है।
निष्कर्ष:
यह विधेयक केवल एक कानूनी बदलाव नहीं है, बल्कि समाज की संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को ध्यान में रखते हुए लिया गया एक ऐतिहासिक फैसला है। अगर सीनेट से भी मंजूरी मिलती है, तो फ्रांस उन देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जहाँ मौत चुनना, कुछ शर्तों के साथ, एक मान्य अधिकार होगा।

