पेरिस: फ्रांस से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने न केवल कानून व्यवस्था बल्कि मानवता की भी नींव को झकझोर कर रख दिया है। एक पूर्व सर्जन जोएल ले स्कॉरनेक को करीब 300 बच्चों के साथ यौन अपराध का दोषी पाया गया है। इस बेहद चौंकाने वाले मामले में अदालत ने उसे 20 साल की सजा सुनाई है।
दो दशकों तक चलती रही दरिंदगी
यह मामला 1989 से लेकर 2014 के बीच की घटनाओं को उजागर करता है, जब ले स्कॉरनेक ने 141 लड़कियों और 158 लड़कों को अपना निशाना बनाया। इन घटनाओं की सबसे भयावह बात यह है कि अधिकतर शिकार बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती मरीज थे। पीड़ितों की औसत उम्र मात्र 11 साल थी।
पहले से चल रही थी एक और सजा
इससे पहले वर्ष 2020 में, जोएल ले स्कॉरनेक को चार बच्चों, जिनमें उसकी खुद की भतीजी और रिश्तेदार भी शामिल थे, के साथ यौन अपराध के लिए 15 साल की सजा दी जा चुकी है। अदालत में दिए गए बयान में उसने यह भी स्वीकार किया कि 1985 में उसने अपनी 5 वर्षीय भतीजी का शोषण किया था।
डरावनी तफ्तीश: तस्वीरें, वीडियो और डायरी
जब पुलिस ने उसकी संपत्ति की तलाशी ली तो उनके हाथ ऐसी सामग्री लगी जिसने जांचकर्ताओं को भी हैरान कर दिया।
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3 लाख से अधिक अश्लील तस्वीरें
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650 से ज्यादा वीडियो क्लिप्स, जिनमें बाल यौन शोषण और अन्य आपत्तिजनक दृश्य शामिल थे
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साथ ही नोटबुक्स, जिनमें उसने अपने आपराधिक कृत्यों का विवरण दर्ज किया था
कैसे हुआ खुलासा?
2017 में एक छह वर्षीय बच्ची के बयान के बाद इस मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं। बच्ची ने बताया कि उसके पड़ोसी (ले स्कॉरनेक) ने उसके साथ अश्लील हरकत की। इस एक शिकायत ने फ्रांस के सबसे बड़े यौन अपराध मामलों में से एक का पर्दाफाश कर दिया।
सख्त सजा, लेकिन सवाल बाकी
अदालत ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि सजा के दो-तिहाई हिस्से को भुगतने के बाद ही दोषी को पैरोल के लिए योग्य माना जाएगा। हालांकि, इस घटना के सामने आने से फ्रांस में मेडिकल क्षेत्र में निगरानी की भूमिका, बच्चों की सुरक्षा और बाल यौन अपराधों पर रोक लगाने की मौजूदा व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

