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बंजर जमीन में भी मुनाफा दे सकता है सहजन, राजस्थान के किसानों के लिए फायदे की खेती

राजस्थान के किसान कम लागत में ज्यादा कमाई करना चाहते हैं तो सहजन (मोरिंगा) की खेती उनके लिए अच्छा विकल्प बन सकती है। यह औषधीय पौधा बंजर या कम उपजाऊ जमीन में भी उग जाता है और अच्छी आमदनी देता है।


सहजन क्यों है खास?

सहजन को ड्रमस्टिक या मोरिंगा भी कहा जाता है। इसकी पत्तियां, फलियां और फूल बहुत उपयोगी होते हैं।

इसका उपयोग:

  • दवाइयों में

  • पशु चारे में

  • पानी साफ करने में

  • जैविक कीटनाशक बनाने में

सहजन में विटामिन, प्रोटीन, आयरन, पोटेशियम, एमीनो एसिड, विटामिन बी और सी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह सूजन, दर्द, उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं में भी फायदेमंद माना जाता है।


कब और कैसे करें बुवाई?

सहजन की बुवाई फरवरी-मार्च या जून-जुलाई में की जा सकती है।

दूरी का ध्यान रखें:

  • बीज से बुवाई: पौधे से पौधे की दूरी 50–60 सेमी

  • लाइन की दूरी: 1 मीटर

  • कटिंग से रोपण: 1.5 x 1.5 मीटर दूरी

खाद और पोषक तत्व:

  • गोबर की खाद: 10–15 टन प्रति हेक्टेयर

  • नाइट्रोजन: 60–80 किग्रा

  • फास्फोरस: 40 किग्रा

  • पोटाश: 40 किग्रा

जिंक और बोरोन की कमी होने पर पत्तियों पर स्प्रे करना फायदेमंद होता है।


सिंचाई कैसे करें?

  • शुरुआती 1–2 महीने हल्की सिंचाई करें

  • बाद में हर 10–15 दिन में पानी दें

  • ड्रिप (बूंद-बूंद) सिंचाई विधि सबसे बेहतर मानी जाती है


जमीन और मौसम

सहजन की खेती शुष्क या अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में अच्छी होती है।

  • तापमान: 25–35 डिग्री

  • वर्षा: 200–450 मिमी

  • मिट्टी: हल्की दोमट या बलुई दोमट

  • पीएच मान: 6.5–8.5

  • खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए

खेत की 2–3 बार गहरी जुताई करके समतल करें और जल निकास की सही व्यवस्था रखें।


कितनी होगी कमाई?

  • पहली कटाई: 65–75 दिन बाद

  • फलियां: 6–8 महीने में तैयार

  • उत्पादन: 15–25 टन प्रति हेक्टेयर

किसान साल में लगभग 4 से 6 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक की आमदनी कर सकते हैं।

सहजन की खेती कम लागत, कम पानी और ज्यादा मुनाफे वाली फसल मानी जाती है। राजस्थान के किसानों के लिए यह एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।

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