
प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के तहत बरेली में क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक और एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला बनाई जानी थी। लेकिन पांच साल तक जमीन तय नहीं हो पाई, जिसके कारण यह परियोजना लखनऊ स्थानांतरित कर दी गई।
लोकसभा में हुआ खुलासा
सांसद नीरज मौर्य ने लोकसभा में स्वास्थ्य मंत्री से सवाल किया। जवाब में बताया गया कि 2021 से 2026 के बीच बरेली में जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी। इसी वजह से परियोजना को लखनऊ भेज दिया गया।
बरेली को मिलनी थी बड़ी सुविधा
उत्तर प्रदेश में 75 एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशालाएं और 74 क्रिटिकल केयर ब्लॉक बनने थे। बरेली भी सूची में शामिल था। लेकिन जमीन की कमी के कारण योजना रुक गई।
यह सवाल उठ रहा है कि जिस जिले को मेडिकल हब बनाने की बात होती है, वहां एक अस्पताल ब्लॉक के लिए जमीन क्यों नहीं मिल सकी।
संक्रमण की समस्या, लेकिन सुविधा नहीं
बरेली और तराई क्षेत्र में मलेरिया, डेंगू, जापानी एन्सेफलाइटिस, स्क्रब टाइफस जैसी बीमारियों का खतरा रहता है। सरकार ने कहा कि निगरानी के लिए पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर आधुनिक लैब और मजबूत स्वास्थ्य ढांचा नहीं बन पाया।
डायलिसिस और कीमोथेरेपी पर जवाब
मंत्री ने कहा कि डायलिसिस और कीमोथेरेपी जैसी सेवाएं राज्यों की मांग और संसाधनों पर निर्भर करती हैं। यानी स्थानीय स्तर की पहल जरूरी है।
सांसद ने उठाए सवाल
सांसद नीरज मौर्य ने कहा कि अगर जरूरी स्वास्थ्य योजनाओं के लिए भी जमीन नहीं मिलती, तो यह प्रशासन की विफलता है। उन्होंने कहा कि स्वीकृत योजनाएं कागजों में रह जाती हैं और जनता को केवल घोषणाएं मिलती हैं।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे इस योजना को फिर से बरेली में लाने की कोशिश करेंगे और समयबद्ध कार्रवाई की मांग करेंगे।
स्थानीय प्रशासन पर सवाल
बरेली में हर साल डेंगू और अन्य संक्रामक बीमारियों के मामले बढ़ते हैं। गंभीर मरीजों को इलाज के लिए दूसरे शहर जाना पड़ता है। अगर यह क्रिटिकल केयर ब्लॉक बन जाता, तो स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलती। अब यह सुविधा दूसरे शहर को मिल गई है।
