भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच बलूच विद्रोहियों ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के मंगोचर शहर पर नियंत्रण का दावा किया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब पहलगाम आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के संबंध और भी तनावपूर्ण हो गए हैं। पाकिस्तान की सेना की कमजोरी और विद्रोहियों की बढ़ती ताकत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या पाकिस्तान आंतरिक मोर्चे पर पहले ही पराजय की ओर बढ़ रहा है?
सरकारी इमारतों पर नियंत्रण, सैन्य शिविरों पर हमले
सूत्रों और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के अनुसार, बलूच विद्रोहियों ने मंगोचर शहर की कई सरकारी इमारतों पर कब्जा कर लिया है। वीडियो में विद्रोहियों को प्रशासनिक भवनों पर अपने झंडे फहराते और हथियारबंद गश्त करते देखा गया। झड़पों में पाकिस्तान सेना को निशाना बनाते हुए विद्रोहियों ने कथित तौर पर एक सैन्य कैंप पर हमला किया और हथियार भी जब्त किए।
पश्चिमी सीमा पर सेना की तैनाती, लेकिन बलूच विद्रोह तेज
पाकिस्तान ने भारत से संभावित खतरे को देखते हुए पश्चिमी सीमा पर सेना की अतिरिक्त तैनाती की है, लेकिन बलूच विद्रोहियों के हमले लगातार तेज हो रहे हैं। पिछले महीने 26 अप्रैल को हुए एक आईईडी हमले में दस अर्धसैनिक बल के जवानों की मौत हो गई थी, जिसकी जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने ली थी।
दोनों पक्षों के आंकड़ों में भारी विरोधाभास
पाकिस्तान सरकार का दावा है कि उसने हालिया घटनाओं में बंधकों को रिहा किया है और स्थिति पर नियंत्रण पा लिया है। वहीं बीएलए ने इसका खंडन करते हुए कहा कि उसने 50 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और 214 बंधकों को खत्म किया है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन आंकड़ों में भारी अंतर यह दिखाता है कि स्थिति अभी भी अस्थिर बनी हुई है।
पृष्ठभूमि में पहलगाम हमला और भारत-पाक रिश्तों में गिरावट
इस संकट के बीच 22 अप्रैल को भारत के जम्मू-कश्मीर स्थित पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक दूरी और बढ़ा दी है। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी, जिसकी जिम्मेदारी शुरू में ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने ली, लेकिन बाद में उसने इससे इनकार कर दिया।
गौरतलब है कि यह हमला पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के विवादास्पद हिंदू-विरोधी बयान के कुछ ही दिन बाद हुआ था, जिससे भारत में नाराजगी और अधिक बढ़ गई।
क्या पाकिस्तान अंदर से बिखर रहा है?
बलूचिस्तान में लगातार बढ़ रहे विद्रोह और सैन्य ठिकानों पर हमलों से यह सवाल उठने लगा है कि पाकिस्तान कहीं अंदर से टूटने की कगार पर तो नहीं पहुंच गया है। जहां एक ओर अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर वह भारत से तनाव झेल रहा है, वहीं घरेलू स्तर पर उसे बलूच विद्रोहियों से गंभीर चुनौती मिल रही है।

