
जगदलपुर: बस्तर के जंगलों और गांवों में महुआ के फूल गिरना शुरू हो गया है। आदिवासी परिवार सुबह-सुबह जंगल और खेतों में महुआ इकट्ठा करने निकल पड़ते हैं। महुआ आदिवासियों की आमदनी का प्रमुख स्रोत है, जिसे वे सरकार और व्यापारियों को बेचते हैं।
एक पेड़ से तीन क्विंटल तक महुआ
- एक स्वस्थ महुआ पेड़ से 2 से 3 क्विंटल तक फूल मिल सकते हैं।
- जंगलों में इन पेड़ों पर स्थानीय ग्रामीणों का अधिकार होता है।
- आदिवासी महुआ के पेड़ की देखभाल बहुत जतन से करते हैं और इसे देवता की तरह पूजते हैं।
महुआ के कारण जंगलों में आग का खतरा
- महुआ इकट्ठा करने के लिए ग्रामीण पेड़ के नीचे आग जलाते हैं और उसे बिना बुझाए छोड़ देते हैं।
- इससे आग पूरे जंगल में फैल सकती है और वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचता है।
- वन विभाग इसे रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाता है।
महुआ के मौसम से जंगलों में रौनक
- सुबह-सुबह जंगलों में आदिवासी परिवार महुआ इकट्ठा करते दिखते हैं।
- सूरज चढ़ने के साथ फूल गिरना कम हो जाता है, इसलिए लोग सुबह जल्दी ही महुआ बीनने पहुंच जाते हैं।
इस साल फसल सामान्य रहने की उम्मीद
- जानकारों के अनुसार इस साल महुआ की पैदावार सामान्य रहेगी।
- शुष्क मौसम और जलवायु परिवर्तन की वजह से बंपर उत्पादन की संभावना कम है, लेकिन पिछले साल से हालात बेहतर हो सकते हैं।