बांग्लादेश के दो पोर्ट अब अमेरिका के इस्तेमाल में
अंडमान से सिर्फ 1100 किमी दूर एक बंदरगाह, सीक्रेट जानकारी साझा करने पर भी हुआ समझौता
channel_009 | इंटरनेशनल डिफेंस रिपोर्ट
दक्षिण एशिया की राजनीति और सुरक्षा समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। बांग्लादेश ने अपने दो अहम बंदरगाहों के इस्तेमाल की अनुमति अमेरिका को दे दी है। इनमें से एक पोर्ट भारत के अंडमान-निकोबार द्वीप समूह से करीब 1100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बताया जा रहा है।
इस समझौते के साथ दोनों देशों के बीच संवेदनशील और सीक्रेट जानकारियां साझा करने को लेकर भी सहमति बनी है। माना जा रहा है कि यह कदम हिंद महासागर क्षेत्र में अमेरिका की रणनीतिक मौजूदगी को और मजबूत करेगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका इन पोर्ट्स का इस्तेमाल लॉजिस्टिक्स, सैन्य सहयोग और समुद्री निगरानी के लिए कर सकता है। इस डील को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बांग्लादेश का यह फैसला दक्षिण एशिया की भू-राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है। खासतौर पर भारत, चीन और अमेरिका के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच यह समझौता काफी अहम माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग बढ़ाने, खुफिया सूचनाएं साझा करने और समुद्री गतिविधियों पर निगरानी को लेकर भी कई स्तरों पर बातचीत हुई है।
इस घटनाक्रम पर क्षेत्रीय देशों की नजर बनी हुई है, क्योंकि हिंद महासागर में बढ़ती सैन्य और रणनीतिक गतिविधियां आने वाले समय में नए समीकरण पैदा कर सकती हैं।

