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बांग्लादेश: पांच महीने से जेल में बंद हिंदू संत चिन्मय दास को हाई कोर्ट से मिली जमानत

Chinmoy-Krishna-Das

ढाका, 29 अप्रैल 2025: बांग्लादेश की उच्च न्यायालय ने हिंदू धर्मगुरु चिन्मय कृष्ण दास को अंतरिम राहत देते हुए जमानत दे दी है। वह पिछले पांच महीनों से जेल में बंद थे। यदि देश की सर्वोच्च अदालत इस फैसले पर रोक नहीं लगाती, तो उन्हें शीघ्र रिहा किया जा सकता है।

चिन्मय दास, जो इस्कॉन के पुजारी और सनातनी जागरण जोत के प्रवक्ता भी हैं, को 25 नवंबर 2024 को ढाका अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि उन्होंने बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का कथित रूप से अपमान किया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें चटगांव की एक अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

उनकी जमानत याचिका पहले चटगांव की अदालत ने खारिज कर दी थी। इसके बाद उनके वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने 23 अप्रैल 2025 को हाई कोर्ट में जमानत की अर्जी दाखिल की। न्यायमूर्ति मोहम्मद अताउर रहमान और न्यायमूर्ति मोहम्मद अली रजा की खंडपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें जमानत प्रदान की।

चिन्मय दास के वकील प्रोलाद देब नाथ ने जानकारी दी कि उनके मुवक्किल की तबीयत खराब है और वह बिना किसी सुनवाई के लंबे समय से जेल में हैं। अदालत ने सरकार से पूछा था कि उन्हें जमानत क्यों न दी जाए, जिसके बाद यह राहत मिली।

इस मामले की शुरुआत 31 अक्टूबर 2024 को हुई थी, जब चटगांव के मोहोरा वार्ड से बीएनपी के पूर्व महासचिव फिरोज खान ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद यह प्रकरण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया।

फिलहाल, हाई कोर्ट के आदेश के बाद चिन्मय दास की रिहाई की संभावनाएं बढ़ गई हैं, हालांकि अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।

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