ढाका: बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। देश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने अंतरिम प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। पार्टी ने दिसंबर तक आम चुनाव कराने की मांग को लेकर राजधानी ढाका में हजारों समर्थकों के साथ रैली निकाली।
लंदन से बोलते हुए तारिक रहमान ने साधा निशाना
बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान, जो वर्तमान में लंदन में हैं, ने वर्चुअल माध्यम से प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा:
“देश अब और इंतजार नहीं कर सकता। चुनाव दिसंबर तक हर हाल में कराए जाने चाहिए। यदि सरकार तैयार नहीं है, तो यह लोकतंत्र के साथ अन्याय है।”
तारिक ने आरोप लगाया कि यूनुस सरकार जानबूझकर चुनावों में देरी कर रही है और तथाकथित ‘सुधारों’ के नाम पर जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है।
बीएनपी बनाम एनसीपी: सड़कों पर टकराव का संकेत
बीएनपी की रैली में युवाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। यह प्रदर्शन एक तरह से यूनुस समर्थित नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन भी था। एनसीपी का गठन हाल ही में छात्रों द्वारा शुरू किए गए ‘डिस्क्रिमिनेशन विरोधी आंदोलन’ के बाद हुआ था और यह समूह सुधारों को प्राथमिकता देते हुए चुनावों को टालने की वकालत कर रहा है।
बीएनपी नेताओं का आरोप: “संविधान के साथ खिलवाड़”
बीएनपी के वरिष्ठ नेता अमीर खासरू महमूद चौधरी ने कहा:
“सुधारों की आड़ में चुनाव टालने की कोशिश लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश है। यदि न्यायिक प्रक्रिया अधूरी है, तो अगली सरकार उसे पूरा करेगी। लेकिन इसके बहाने चुनाव को टालना अस्वीकार्य है।”
वहीं, पार्टी के दूसरे वरिष्ठ नेता मिर्जा अब्बास ने यूनुस सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा:
“पिछले नौ महीनों में हमें सिर्फ उपेक्षा मिली है। इस सरकार के कई सलाहकार तो देश के नागरिक भी नहीं हैं। उन्हें अधिकार और संवैधानिक सीमाओं का सम्मान करना चाहिए।”
क्या कहती है यूनुस सरकार?
अब तक यूनुस सरकार की ओर से इस प्रदर्शन और आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, एनसीपी पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि वह चुनाव से पहले संस्थागत सुधारों को जरूरी मानती है।
निष्कर्ष:
बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर अस्थिरता के मुहाने पर खड़ी है। बीएनपी जहां जल्द चुनाव कराने पर अड़ी है, वहीं यूनुस सरकार और उससे जुड़े छात्र समूह समय मांग रहे हैं। यह देखना अहम होगा कि आने वाले हफ्तों में सत्ता और विपक्ष के बीच यह संघर्ष आम चुनाव की ओर ले जाता है या एक नया गतिरोध पैदा करता है।

