
बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, और इससे पहले राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस ने एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) से नाता तोड़ने के बाद अब महागठबंधन में शामिल होने के संकेत दिए हैं। कहा जा रहा है कि अगले 5 से 7 दिनों में इसका आधिकारिक ऐलान हो सकता है।
लालू यादव से करीबी बढ़ी
पशुपति पारस ने राजद (राष्ट्रीय जनता दल) और लालू यादव से अपनी नजदीकियों पर कहा कि उनका लालू यादव से पुराना पारिवारिक रिश्ता है। उन्होंने बताया कि महागठबंधन में आने को लेकर कई बार बातचीत भी हो चुकी है।
चिराग पासवान पर तंज
मीडिया से बातचीत में पशुपति पारस ने चिराग पासवान को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा –
“अगर चिराग इतने बड़े नेता हैं, तो कुशेश्वरस्थान और तारापुर उपचुनाव में उनकी पार्टी क्यों हार गई? दोनों जगह उनकी पार्टी की जमानत जब्त हो गई थी। 2020 में जो वोट मिले थे, वो तो सहानुभूति की वजह से थे।”
संपत्ति विवाद पर भी बोले पारस
पशुपति पारस ने कहा कि खगड़िया से लेकर दिल्ली तक की संपत्तियों का समान बंटवारा होना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि तीनों भाई – रामविलास पासवान, पशुपति पारस, और रामचंद्र पासवान – का संपत्ति में बराबर का हिस्सा है। रामविलास पासवान की संपत्ति को दो हिस्सों में नहीं, बल्कि सभी भाइयों में बराबर बांटा जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यह विवाद राजनीतिक साजिश का हिस्सा है और जल्द ही सच्चाई सामने आ जाएगी।
सीट बंटवारे पर हो सकती है खींचतान
अगर पारस की पार्टी महागठबंधन में आती है, तो सीटों के बंटवारे को लेकर विवाद हो सकता है। पारस ने साफ कहा है कि वे सम्मानजनक संख्या में सीटें चाहते हैं। जबकि महागठबंधन के अन्य दल भी ज्यादा सीटें मांग सकते हैं।
अगर आप चाहें, तो मैं इसका सारांश ग्राफिक्स या पीडीएफ में भी बना सकता हूँ।
