
याचिका में आरोप लगाया गया था कि चुनाव के दौरान करीब 15,600 करोड़ रुपये नकद मतदाताओं में बांटे गए और इसी वजह से चुनाव अवैध तरीके से जीते गए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सीधे सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
CJI की कड़ी टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान साफ शब्दों में कहा कि
“सिर्फ इसलिए कि आप चुनाव हार गए, क्या पूरे चुनाव को ही रद्द कर दिया जाए?”
कोर्ट ने कहा कि चुनाव रद्द करने के लिए एक निश्चित कानूनी प्रक्रिया होती है और इस तरह की संयुक्त याचिका को सीधे सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट जाने की छूट
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने जन सुराज पार्टी को यह छूट जरूर दी कि वह इसी मुद्दे पर संबंधित हाईकोर्ट का रुख कर सकती है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को अपने स्तर पर सुनवाई योग्य नहीं माना।
कल्याणकारी योजनाओं पर भी टिप्पणी
CJI ने यह भी कहा कि कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े मामलों में राजनीतिक दलों को याचिकाकर्ता के रूप में नहीं आना चाहिए। ऐसे मामले किसी जनहित में काम करने वाले व्यक्ति द्वारा लाए जाने चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि अगर राजनीतिक दलों की ऐसी याचिकाएं स्वीकार की जाएं, तो जो पार्टी आज विरोध कर रही है, वही कल सत्ता में आकर वही काम करेगी।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि चुनाव हारने के आधार पर पूरे चुनाव को रद्द नहीं किया जा सकता। कोर्ट की इन सख्त टिप्पणियों के साथ जन सुराज पार्टी की याचिका को खारिज कर दिया गया है।
