
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां को लेकर की गई अभद्र टिप्पणी के विरोध में गुरुवार को एनडीए ने बिहार बंद का आह्वान किया। सुबह 7 बजे से दोपहर 1 बजे तक बंद रखा गया। बंद को सफल बनाने की जिम्मेदारी भाजपा महिला मोर्चा को दी गई, जो पटना समेत राज्यभर में सड़कों पर उतरीं।
पटना: सड़कों पर महिला मोर्चा, आगजनी और प्रदर्शन
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आयकर चौराहा और डाकबंगला चौराहा पर भारी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे।
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बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल और सांसद रविशंकर प्रसाद खुद सड़क पर उतरे।
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सगुना मोड़ पर बंद समर्थकों ने आगजनी की।
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बिहटा में स्कूल बस को वापस भेज दिया गया।
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कुछ स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई।
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आपातकालीन सेवाएं (एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड) चालू रहीं।
गया: नेताओं ने चेताया – 2025 में लेंगे बदला
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एनडीए नेताओं ने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव से सार्वजनिक माफी की मांग की।
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कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकालकर बाजार बंद कराया।
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नारे लगाए:
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“राहुल-तेजस्वी मुरदाबाद”
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“हिंदुस्तान नहीं सहेगा अपमान”
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“मां का अपमान नहीं सहेगा बिहार”
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सीवान: सड़कें और चौराहे जाम
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बबुनिया मोड़, गोपालगंज मोड़, और रेलवे स्टेशन की सड़कें बंद।
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ट्रकों व अन्य वाहनों को बीच सड़क खड़ा कर रास्ता रोका गया।
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प्रदर्शनकारियों ने तख्तियां लेकर कहा: “मां का अपमान नहीं सहेगा बिहार”
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जनता को परेशान न करने की कोशिश की गई।
बेगूसराय: मंत्री खुद उतरे मैदान में
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बिहार सरकार के मंत्री सुरेंद्र मेहता ने सड़कों और दुकानों को खुद बंद कराया।
जनता ने उठाए बेरोजगारी और विकास के मुद्दे
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कई स्थानीय लोगों ने बंद के मुद्दे पर नाराजगी जताई।
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कहा, बेरोजगारी और उद्योग की कमी पर अगर ऐसे बंद होते, तो बेहतर होता।
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15 वर्षों में भाजपा की भागीदारी के बावजूद कोई बड़ा उद्योग या चीनी मिल नहीं बनी।
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लोगों ने कहा कि नेता इन असल मुद्दों पर भी बात करें और जनता से माफी मांगें।
निष्कर्ष
बिहार बंद को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाज़ी देखने को मिली। हालांकि, आम लोगों में बेरोजगारी और विकास जैसे मुद्दों को लेकर भी गुस्सा नजर आया। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आगे इस बंद का कितना असर होता है।
