
उद्योग मंत्री की क्या थी मांग?
उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि बिहार में उद्योग लगाने के लिए जमीन की कमी एक बड़ी समस्या है। कई जगह नदियों का रास्ता बदल गया है। कहीं बांध बनने से पुरानी नदी की जमीन खाली हो गई है और कहीं नई जमीन बन गई है।
लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में इन जमीनों की प्रकृति ऐसी दर्ज है कि इन्हें उद्योगों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
उन्होंने उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा से आग्रह किया कि जल संसाधन विभाग के साथ बैठकर इन जमीनों की समीक्षा की जाए, ताकि बदलती भौगोलिक स्थिति के अनुसार जमीन की प्रकृति बदली जा सके। इससे उद्योग लगाने में आसानी होगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
राजद विधायक ने क्यों ली चुटकी?
मंत्री की बात खत्म होते ही राजद विधायक भाई वीरेंद्र खड़े हुए और बोले कि यह पहली बार देख रहे हैं जब एक मंत्री को अपनी मांग मनवाने के लिए दूसरे मंत्री से सदन में गुहार लगानी पड़ रही है।
उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों पर चर्चा कैबिनेट या आपसी बैठकों में होनी चाहिए, न कि विधानसभा में।
बढ़ी नोकझोंक
भाई वीरेंद्र की टिप्पणी पर उद्योग मंत्री ने जवाब दिया कि वे राज्य के विकास की बात कर रहे हैं और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि उद्योग आएंगे तो रोजगार बढ़ेगा और राज्य को फायदा होगा। इस दौरान हल्की नोकझोंक भी हुई।
सम्राट चौधरी ने संभाला मामला
मामला ज्यादा न बढ़े, इसके लिए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बीच में दखल दिया और सभी से शांति बनाए रखने की अपील की। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही आगे बढ़ाई और मामला शांत हो गया।
हालांकि यह घटना सदन में चर्चा का विषय बनी रही और राजनीतिक गलियारों में इसकी खूब चर्चा हुई।
