
पंजाब क्षेत्र में बीकानेर कैनाल और खखां हैड से शिवपुर हैड तक नहर का पानी चोरी करना आम बात बन चुकी है। जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन की लापरवाही के कारण यह अवैध काम खुलेआम जारी है। हर साल खरीफ और रबी सीजन में जब किसानों को पानी की जरूरत होती है, तब सिंचाई के लिए पानी की भारी किल्लत होती है। मजबूरी में किसानों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ता है, लेकिन पानी चोरी रोकने के नाम पर सिर्फ औपचारिकता होती है।
15 किलोमीटर में चल रही खुलेआम चोरी
45 आरड़ी से सखां हैड और खखां हैड से शिवपुर हैड तक का करीब 15 किलोमीटर का इलाका पानी चोरी का अड्डा बना हुआ है। यहां किसान नहर में गुपचुप तरीके से पाइप लगाकर पानी निकाल रहे हैं। यह सब कुछ विभाग और अधिकारियों को पता होते हुए भी कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती।
छापे की भनक पहले ही लग गई
गंगनहर प्रोजेक्ट के चेयरमैन हरविंद्र सिंह गिल ने बताया कि रविवार रात विभाग और पुलिस की टीम शिवपुर हैड पहुंची, लेकिन किसानों को पहले ही भनक लग गई। उन्होंने चोरी के पाइप हटा लिए और मौके से भाग गए। कुछ पाइप जरूर जब्त किए गए, मगर सोमवार तक एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई।
बारानी जमीन पर हो रही अवैध खेती
गिल ने बताया कि खखां हैड से शिवपुर हैड तक दोनों ओर की जमीन बारानी (बिना सिंचाई सुविधा वाली) है। यहां किसी को नहर का पानी लेने का अधिकार नहीं है, फिर भी किसान चोरी से सिंचाई कर फसलें उगा रहे हैं।
प्रशासन की लापरवाही पर सवाल
गिल का कहना है कि अब तक किसी अधिकारी ने न कोई पुख्ता कदम उठाया और न किसी चोर को रंगे हाथों पकड़ा। सवाल यह है कि हर साल पानी चोरी का यह खेल चलता है, लेकिन प्रशासन केवल तब सक्रिय होता है जब किसान आंदोलन की चेतावनी देते हैं।
अब ज़रूरत है सख्त निगरानी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की, वरना पानी की यह चोरी आगे भी किसानों को नुकसान पहुंचाती रहेगी।
