
प्रदेश अध्यक्ष के लिए बढ़ी हलचल
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मार्च 2025 में चुनाव प्रस्तावित है, जिसमें नवनिर्वाचित जिलाध्यक्षों और प्रांतीय पार्षदों को मतदान करना होगा।
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बीजेपी पहले ही जिलाध्यक्षों का चुनाव कर चुकी है, अब प्रांतीय पार्षद भी तय हो गए हैं।
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अध्यक्ष पद के लिए दावेदार दिल्ली में शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं और समीकरण बैठाने की कोशिश कर रहे हैं।
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कुमाऊं से तीन दावेदार खुलकर सामने आ चुके हैं, लेकिन पार्टी के सियासी समीकरणों को देखते हुए माना जा रहा है कि गढ़वाल से किसी नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है।
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विधानसभा बजट सत्र के विवाद के बाद हालात तेजी से बदल रहे हैं, जिससे चुनाव और भी दिलचस्प हो गया है।
महेंद्र भट्ट की स्थिति कमजोर?
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पहले माना जा रहा था कि मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को दोबारा मौका मिल सकता है, लेकिन विधानसभा बजट सत्र के दौरान हुए विवादों के कारण उनकी स्थिति कमजोर हो गई है।
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कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल की विवादित टिप्पणी और उनके बेटे के रिजॉर्ट निर्माण को लेकर उठे विवाद के कारण महेंद्र भट्ट भी चर्चाओं में आ गए हैं।
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अवैध सड़क निर्माण के मामले में प्रेमचंद अग्रवाल के बेटे पर कार्रवाई हुई, जिससे पार्टी की छवि प्रभावित हुई।
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राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि पार्टी अब किसी नए और बड़े नेता को प्रदेश अध्यक्ष बना सकती है।
शीर्ष नेतृत्व करेगा अंतिम फैसला
प्रदेश अध्यक्ष के चयन के लिए चुनाव अधिकारी विधायक खजानदास ने पुष्टि की है कि शीर्ष नेतृत्व ने प्रांतीय पार्षदों के नाम मांगे हैं। अब देखना होगा कि पार्टी किसे नया प्रदेश अध्यक्ष बनाती है।
