
कैसे हुआ खुलासा?
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ऑडिट के दौरान पीओएस मशीन और भौतिक स्टॉक में भारी अंतर पाया गया।
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यूरिया और डीएपी खाद के स्टॉक में बड़ा हेरफेर किया गया।
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यह घोटाला कोई एक दिन का नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहा था।
प्रबंधक पर पहले भी लगे हैं आरोप
समिति के प्रबंधक योगेश पटेल पर पहले भी कई अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं, बावजूद इसके वे 7-8 साल से पद पर बने हुए हैं। घोटाले के उजागर होते ही प्रबंधक ने खुद को बचाने के लिए खाद प्रभारी को नोटिस जारी कर दिया।
शासन ने लिया संज्ञान, दो विभागों ने शुरू की जांच
सहकारिता और कृषि विभाग ने इस घोटाले की जांच के आदेश दिए हैं। किसानों का कहना है कि यह खाद उन्हीं के लिए आई थी, लेकिन भ्रष्टाचार के कारण उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पाया।
अब बड़ा सवाल – होगी कार्रवाई या दब जाएगा मामला?
किसानों में इस घोटाले को लेकर जबरदस्त आक्रोश है। सवाल उठ रहा है कि क्या दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा? अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है।
